AIMS के डॉक्टरों का भंग हो रहा संस्थान से मोह..!
तेजी से आ रहे इस्तीफे…
18 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
देशभर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से डॉक्टरों के पलायन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। संसद में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच 20 एम्स संस्थानों से कुल 429 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। ये इस्तीफे ऐसे समय में आए हैं, जब अधिकांश एम्स पहले से ही संकाय और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं।
एम्स दिल्ली में सबसे ज्यादा इस्तीफे
आंकड़ों के मुताबिक, एम्स दिल्ली से सबसे अधिक 52 डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी। एम्स दिल्ली को सभी एम्स में सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है। इसके बाद एम्स ऋषिकेश से 38, एम्स रायपुर से 35, एम्स बिलासपुर से 32 और एम्स मंगलगिरी से 30 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया।
हर तीन में से एक फैकल्टी पोस्ट खाली
सरकार के अनुसार, देश के 20 एम्स में औसतन हर तीन में से एक फैकल्टी का पद खाली है। एम्स दिल्ली में 1,306 स्वीकृत फैकल्टी पोस्ट में से 462 (35%) पद खाली हैं। एम्स भोपाल में 71 (23%) और एम्स भुवनेश्वर में 103 (31%) पोस्ट रिक्त हैं। यही स्थिति अन्य एम्स में भी है, जहां खाली फैकल्टी पोस्ट का प्रतिशत 20% से 35% के बीच है। इसके अलावा नर्सों, ओटी तकनीशियनों और अन्य जरूरी नॉन-फैकल्टी पद भी खाली पड़े हैं।
ब्रेन ड्रेन रोकने के प्रयास
सरकार ने बताया कि नए एम्स में प्रोफेसर, एडिशनल प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के स्तर पर रिटायर्ड फैकल्टी को 70 वर्ष तक अनुबंध पर नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, देश और विदेश के संस्थानों में कार्यरत प्रोफेसरों को विजिटिंग फैकल्टी योजना के तहत पढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।
प्राइवेट सेक्टर में 4 से 10 गुना ज्यादा सैलरी
एम्स से हाल ही में प्राइवेट सेक्टर में जाने वाले एक सीनियर डॉक्टर के अनुसार, निजी अस्पतालों में एम्स की तुलना में चार से दस गुना अधिक वेतन मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि रिसर्च के लिए पर्याप्त समय न मिलना और कार्यस्थल पर संसाधनों की कमी भी प्रतिभा पलायन का बड़ा कारण है।