गर्भाशय की जगह लीवर में पल रहा था बच्चा..
यूपी की इस महिला की प्रेग्नेंसी देख डॉक्टर्स भी हुए हैरान…
1 months ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से सामने आया एक मामला मेडिकल जगत के लिए हैरान कर देने वाला बन गया है। यहां एक 30 वर्षीय महिला लंबे समय से पेट दर्द और उल्टी की परेशानी से जूझ रही थी। जब यह समस्याएं लगातार बनी रहीं, तो डॉक्टर्स ने उसे एमआरआई जांच के लिए एक निजी सेंटर पर भेजा। लेकिन जो रिपोर्ट आई, उसने डॉक्टर्स को भी चौंका दिया।
लीवर में पल रहा था भ्रूण
दरअसल, बुलंदशहर की रहने वाली ये महिला गर्भवती थी, लेकिन यह सामान्य प्रेग्नेंसी नहीं थी। चिकित्सकों की जांच में सामने आया कि 12 हफ्ते का एक भ्रूण महिला के लीवर के दाहिने हिस्से में विकसित हो रहा था और सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि भ्रूण जीवित था, उसकी धड़कनें भी चल रही थीं।
क्या होती है ईसीटॉपिक प्रेग्नेंसी?
फरीदाबाद स्थित मारेंगो एशिया हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉ. श्वेता मेंदिरत्ता ने इस स्थिति को "Ectopic Pregnancy" यानी गर्भाशय के बाहर गर्भधारण कहा। उन्होंने बताया कि आमतौर पर भ्रूण गर्भाशय के भीतर विकसित होता है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में यह अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, आंतों या लीवर जैसे अंगों में भी पनप सकता है।
लीवर में भ्रूण का विकास एक अत्यंत दुर्लभ घटना है और इसे चिकित्सा विज्ञान में एक जटिल एवं जोखिमपूर्ण स्थिति माना जाता है। ऐसी स्थिति मां और भ्रूण दोनों के लिए जानलेवा हो सकती है, क्योंकि लीवर में पोषण और रक्त प्रवाह भ्रूण की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते।
मां और भ्रूण दोनों के लिए खतरा
जानकार बताते हैं कि लीवर में प्रेग्नेंसी के चलते महिला के शरीर में अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण या अंगों को नुकसान जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए इस स्थिति का इलाज तत्काल जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में आमतौर पर सर्जरी का सहारा लिया जाता है, जिससे भ्रूण को सुरक्षित तरीके से हटाया जा सके और महिला के स्वास्थ्य को खतरे से बाहर लाया जा सके।
क्या हैं इसके लक्षण ?
डॉ. मेंदिरत्ता के मुताबिक ईसीटॉपिक प्रेग्नेंसी के लक्षणों में तेज पेट दर्द, रक्तस्राव, कमजोरी, उल्टी या जी मिचलाना शामिल हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। अगर कोई महिला ऐसी स्थिति महसूस करती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
समय रहते पहचान है जरूरी
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी से जुड़े लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय रहते जांच और इलाज से न केवल महिला की जान बचाई जा सकती है, बल्कि भविष्य में गर्भधारण की संभावनाओं को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।