शराब या सिगरेट किसकी छुटेगी आसानी से लत..!
जानें नशे और लत के पीछे का साइंस…
29 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
अक्सर लोग शराब या सिगरेट का सेवन दोस्तों की संगत में, जिज्ञासा या शौक के चलते शुरू कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे ये आदत लत बन जाती है, और जब छोड़ने की बारी आती है, तो यह काम बेहद कठिन साबित होता है। इन दोनों नशों ने समाज में गहरी पैठ बना ली है। ये जहां एक ओर ये स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं दूसरी ओर जीवन की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को भी झकझोरते हैं।
सिगरेट: निकोटीन की जकड़ में दिमाग
सिगरेट में मौजूद निकोटीन एक ऐसा रसायन है जो सिगरेट पीते ही कुछ सेकंड में दिमाग तक पहुंच जाता है। यह दिमाग में डोपामाइन नाम का केमिकल रिलीज करता है, जो खुशी और संतुष्टि का अहसास कराता है। यही अस्थायी राहत धीरे-धीरे व्यक्ति को बार-बार सिगरेट की तरफ खींचती है। निकोटीन की लत इतनी गहरी होती है कि इसे छोड़ना मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर मुश्किल होता है। ये आदत दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है—सुबह की चाय से लेकर तनाव भरे लम्हों तक, हर मोड़ पर इसकी याद सताती है।
शराब: सामाजिक बोतल में बंद लत
शराब का असर सीधा दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स पर होता है, जिससे कभी सुकून तो कभी जोश का अनुभव होता है। शुरुआत में शराब केवल सामाजिक अवसरों तक सीमित रहती है, लेकिन धीरे-धीरे ये निजी ज़रूरत बन जाती है। शराब की लत थोड़े लंबे समय में लगती है। अक्सर 1 से 2 साल के नियमित सेवन के बाद। लेकिन अगर लगातार 5 साल तक इसका सेवन किया जाए तो इसकी लत इतनी गहरी हो जाती है कि छोड़ना आसान नहीं रहता। यह सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक निर्भरता बन जाती है।
कौन है ज्यादा खतरनाक ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सिगरेट यानी निकोटीन की लत ज्यादा तेज़ी से लगती है और इसे छोड़ना भी उतना ही कठिन होता है। इसका कारण है निकोटीन का दिमाग पर तुरंत असर और आदत का मनोवैज्ञानिक जुड़ाव। हालांकि शराब की लत भी कम खतरनाक नहीं, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे बढ़ता है और सामाजिक स्वीकृति के कारण इसे पहचानना और छोड़ना और भी कठिन हो जाता है।