अगर मेडिकल स्टोर से खरीद रहे हैं दवा, तो पहले इन 3 बातों की जांच जरूर कर लें,
वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
1 months ago
Written By: Ashwani Tiwari
How to Identify Fake Medicines: अगर आप बीमार होने पर डॉक्टर की बताई दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदते हैं और यह मान लेते हैं कि वह दवा आपकी सेहत ठीक कर देगी, तो जरा सावधान हो जाइए। देशभर में नकली दवाओं का बड़ा रैकेट सक्रिय है जो असली दवाओं की तरह दिखने वाली नकली दवाएं बाजार में खपा रहा है। कई बार लोग अनजाने में नकली दवा खा लेते हैं जिससे फायदा तो दूर, उल्टा सेहत और बिगड़ जाती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि असली और नकली दवा के बीच फर्क कैसे करें।
पैकेजिंग से पकड़ में आ सकती है नकली दवा
नकली दवाएं अक्सर असली ब्रांड की हूबहू नकल होती हैं, लेकिन ध्यान से देखने पर इनमें अंतर नजर आ सकता है। असली दवा की पैकिंग साफ, मजबूत और उस पर छपी जानकारी स्पष्ट होती है। मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और एमआरपी साफ पढ़ी जा सकती है। वहीं नकली दवा की पैकिंग हल्की गुणवत्ता की होती है, प्रिंट धुंधला या टेढ़ा-मेढ़ा हो सकता है, और कभी-कभी जरूरी जानकारी गायब भी हो सकती है। अगर कोई गड़बड़ दिखे तो उस दवा को न खरीदें।
क्यूआर कोड और होलोग्राम से करें दवा की पुष्टि
आजकल असली दवाओं पर होलोग्राम या क्यूआर कोड होते हैं, जो उनकी पहचान की गारंटी होते हैं। मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करने पर दवा की पूरी जानकारी आपके फोन पर आ जाती है – जैसे कंपनी का नाम, निर्माण तिथि, बैच नंबर आदि। अगर स्कैन करने पर कोई जानकारी नहीं मिलती, या गलत जानकारी दिखती है, तो समझिए दवा नकली हो सकती है। नकली दवाओं पर अक्सर क्यूआर कोड होता ही नहीं, या वो स्कैन नहीं होता।
दवा की रसीद और मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जरूर देखें
दवा खरीदते वक्त मेडिकल स्टोर से रसीद जरूर लें। इससे आपको यह सबूत मिलेगा कि आपने दवा कहां से खरीदी थी और अगर कोई शिकायत करनी हो तो आपके पास आधार रहेगा। चाहें तो आप दुकान का फार्मेसी लाइसेंस नंबर भी मांग सकते हैं ताकि भरोसा हो सके कि आप किसी पंजीकृत दुकान से ही दवा ले रहे हैं।
छोटी सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा
दवा की जांच करना आपकी जिम्मेदारी है क्योंकि स्वास्थ्य से बड़ा कुछ नहीं। नकली दवा से न सिर्फ बीमारी ठीक नहीं होती, बल्कि शरीर पर गंभीर असर भी हो सकता है। इसलिए पैकेजिंग ध्यान से देखें, क्यूआर कोड जरूर स्कैन करें और हमेशा रसीद लें। किसी भी शंका की स्थिति में डॉक्टर या फार्मासिस्ट से दोबारा पुष्टि करें। आपकी सतर्कता ही आपकी सेहत की सबसे मजबूत ढाल है।