कुत्तों में रेबीज टीकाकरण का क्या है सही शेड्यूल
जानें कब कराये टीकाकरण
18 days ago
Written By: anjali
रेबीज एक खतरनाक वायरल बीमारी है जो इंसानों और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यह बीमारी संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या लार के संपर्क में आने से फैलती है और सीधे मस्तिष्क व नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है। एक बार लक्षण शुरू हो जाने के बाद इसका इलाज लगभग असंभव हो जाता है, इसलिए समय पर बचाव ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है। भारत में रेबीज के मामलों में कुत्तों की भूमिका सबसे अधिक होती है, इसलिए पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण न केवल उनकी सेहत के लिए बल्कि परिवार और आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए भी बेहद ज़रूरी है।
कुत्तों में रेबीज टीकाकरण का सही शेड्यूल
पशु चिकित्सकों के अनुसार, पिल्लों को 3-4 महीने की उम्र में पहला रेबीज का टीका लगाना चाहिए।
पहला बूस्टर डोज: एक साल की उम्र में
अगले डोज: हर साल एक बार बूस्टर डोज लगवाना आवश्यक
पहले से वैक्सिनेटेड न होने पर: 3-4 हफ्तों के अंतराल पर दो डोज लगाए जाते हैं
स्ट्रीट डॉग्स का टीकाकरण
सिर्फ पालतू ही नहीं, बल्कि स्ट्रीट डॉग्स का टीकाकरण भी ज़रूरी है। उन्हें पकड़कर कम से कम एक बार रेबीज का टीका लगवाने से संक्रमण के फैलाव का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। इसके लिए स्थानीय नगर निगम या पशु कल्याण संगठनों की मदद ली जा सकती है।
टीकाकरण के समय और बाद में बरती जाने वाली सावधानियां
टीका केवल प्रमाणित वैक्सीन और पंजीकृत पशु चिकित्सक से ही लगवाएं।
टीकाकरण के बाद कुत्ते को 24 घंटे आराम दें।
पर्याप्त पानी और भोजन उपलब्ध कराएं।
टीके के बाद अगर कुत्ते में कमजोरी, बुखार या सुस्ती दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसे समय पर टीकाकरण के जरिए पूरी तरह रोका जा सकता है। सही उम्र पर टीका लगवाना, बूस्टर डोज न भूलना और स्ट्रीट डॉग्स के टीकाकरण पर ध्यान देना न केवल आपके पालतू की जान बचा सकता है, बल्कि इंसानों में इस खतरनाक वायरस के खतरे को भी समाप्त कर सकता है।