प्रेग्नेंसी में क्यों आता है हद से ज्यादा आलस,
क्या है मुख्य कारण
1 months ago
Written By: anjali
गर्भावस्था एक सुखद अनुभव होता है, लेकिन इस दौरान महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन थकान, सुस्ती और ऊर्जा की कमी का कारण बन सकते हैं। यह समस्या आम है, लेकिन इसके पीछे के कारणों को समझकर इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।
गर्भावस्था में थकान के प्रमुख कारण
हार्मोनल परिवर्तन
प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने से नींद और आलस्य बढ़ता है। यह हार्मोन गर्भाशय को स्थिर रखने में मदद करता है, लेकिन इसका साइड इफेक्ट थकान भी हो सकता है।
रक्त की मात्रा में वृद्धि
गर्भावस्था के दौरान शरीर 50% अधिक रक्त बनाता है, जिससे हृदय को अधिक काम करना पड़ता है। इससे ऊर्जा की खपत बढ़ती है और थकान होती है।
आयरन की कमी (एनीमिया)
गर्भ में पल रहे शिशु को ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए अधिक आयरन की आवश्यकता होती है। आयरन की कमी से थकान, चक्कर और कमजोरी महसूस हो सकती है।
नींद की कमी
हार्मोनल बदलाव, बार-बार पेशाब आना, पीठ दर्द या बेचैनी के कारण नींद टूटती है, जिससे दिनभर थकान रहती है।
मानसिक तनाव
गर्भावस्था के दौरान चिंता, भविष्य की जिम्मेदारियों का बोझ और शारीरिक परिवर्तन मानसिक थकान को बढ़ा सकते हैं।
थकान को कम करने के उपाय
पर्याप्त आराम और नींद
दिन में छोटी-छोटी झपकियाँ लें और रात को 7-8 घंटे की नींद लेने का प्रयास करें।
संतुलित आहार
आयरन, प्रोटीन, फोलिक एसिड और विटामिन्स से भरपूर भोजन करें। हरी पत्तेदार सब्जियाँ, ड्राई फ्रूट्स, दालें और डेयरी उत्पादों को आहार में शामिल करें।
हल्की शारीरिक गतिविधि
प्रतिदिन 20-30 मिनट टहलें या प्रेग्नेंसी योग करें। इससे रक्त संचरण बेहतर होगा और ऊर्जा का स्तर बढ़ेगा।
तनाव प्रबंधन
ध्यान (मेडिटेशन), गहरी साँस लेने के व्यायाम या अपने मनपसंद संगीत से तनाव कम करें।
डॉक्टर से सलाह
यदि थकान के साथ सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना या दिल की धड़कन तेज हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह एनीमिया या थायरॉइड की समस्या का संकेत हो सकता है।