क्या है ये बैक्टीरिया जो बनाता है सोना,
कहाँ और कैसे हुई इसकी खोज
1 months ago
Written By: anjali
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई ऐसा जीव है जो पॉलूयशन में रहने के बावजूद भी 24 कैरेट सोना उत्पत्र करता है। जी हां, वैज्ञानिकों ने एक ऐसे अद्भुत सूक्ष्मजीव की खोज की है जो जहरीले और प्रदूषित वातावरण में रहकर 24 कैरेट शुद्ध सोना उत्पन्न करता है। यह बैक्टीरिया क्यूप्रियाविडस मेटालिड्यूरांस (Cupriavidus metallidurans) नाम से जाना जाता है और यह धरती के सबसे विषैले स्थानों पर पनपता है, जहाँ कोई दूसरा जीव जीवित नहीं रह सकता।
यह बैक्टीरिया कैसे बनाता है सोना?
भारी धातुओं को खाता है: यह बैक्टीरिया तांबा, सोना, कैडमियम, पारा और जस्ता जैसी विषैली धातुओं को अपना भोजन बनाता है।
विशेष एंजाइम्स का उपयोग: यह CopA और CupA नामक एंजाइम्स छोड़ता है, जो धातुओं के विषैले प्रभाव को खत्म कर देते हैं।
सोने के नैनोकणों में बदलाव: धातुओं को पचाने के बाद यह बैक्टीरिया उन्हें 24 कैरेट के सोने के महीन कणों के रूप में बाहर निकाल देता है।
कहाँ और कैसे हुई इसकी खोज?
पहली बार 1976 में बेल्जियम के एक धातु प्रसंस्करण कारखाने के कचरे में इस बैक्टीरिया को पाया गया। ऑस्ट्रेलियाई और जर्मन वैज्ञानिकों ने इस पर शोध करके पता लगाया कि यह सोना बनाने की क्षमता रखता है। यह खनन क्षेत्रों, औद्योगिक अपशिष्ट स्थलों और प्रदूषित मिट्टी में पाया जाता है।
क्या इससे असली सोना बनाया जा सकता है?
हाँ! वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इस बैक्टीरिया को बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाए, तो यह प्राकृतिक रूप से सोना उत्पन्न कर सकता है। हालाँकि, अभी यह प्रक्रिया धीमी और छोटे स्तर पर है, लेकिन भविष्य में इसका उपयोग गोल्ड माइनिंग और प्रदूषण नियंत्रण में किया जा सकता है।
यह बैक्टीरिया इतना खास क्यों है?
विषैले वातावरण में जीवित रहता है – जहाँ कोई दूसरा जीव नहीं बच पाता।
भारी धातुओं को डिटॉक्स करता है – पर्यावरण को साफ करने में मददगार।
सोने के नैनोकण बनाता है – जो बेहद मूल्यवान हैं।
क्या यह भविष्य का 'गोल्ड माइनिंग सॉल्यूशन' हो सकता है?
यह बैक्टीरिया न सिर्फ सोना बनाने की क्षमता रखता है, बल्कि प्रदूषित मिट्टी और पानी को शुद्ध करने में भी मदद कर सकता है। वैज्ञानिक इसकी क्षमता को और बेहतर बनाने पर शोध कर रहे हैं। हो सकता है, आने वाले समय में यह जीव धरती का सबसे कीमती 'गोल्ड फैक्ट्री' बन जाए!