कुत्ते के काटने पर सिर्फ रेबिज ही नहीं,
हो सकती है ये गंभीर बीमारी
19 days ago
Written By: anjali
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में घूम रहे आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम्स में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह फैसला लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है, क्योंकि सड़कों पर घूमने वाले इन कुत्तों को आमतौर पर वैक्सीन नहीं लगाई जाती, जिससे इनके काटने पर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर डॉग-बाइट को केवल रैबीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्तों के काटने से और भी कई जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
रोजाना बढ़ते डॉग-बाइट के मामले
देश में लगभग रोजाना किसी न किसी व्यक्ति के आवारा कुत्ते के काटने की खबर आती है। छोटे बच्चे इन हमलों के सबसे अधिक शिकार बनते हैं। कई मामलों में डॉग-बाइट के बाद समय पर इलाज न मिलने से लोगों की जान भी चली जाती है। हाल ही में एक खिलाड़ी की मौत रैबीज के कारण हुई थी।
सिर्फ रैबीज नहीं, इन बीमारियों का भी खतरा
1. Capnocytophaga canimorsus संक्रमण
जस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉ. एन.आर. रावत के अनुसार, कुत्ते के काटने से होने वाली चोट के जरिए Capnocytophaga canimorsus नामक बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है। यह बैक्टीरिया कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों (जैसे बुजुर्ग, डायबिटीज या कैंसर के मरीज) में बेहद घातक साबित हो सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं—
घाव पर पस पड़ना
सूजन और लालिमा
समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर संक्रमण
2. सेप्सिस (Sepsis)
यदि डॉग-बाइट के बाद घाव को अच्छी तरह साफ नहीं किया गया, तो बैक्टीरिया खून की धमनियों में फैल सकता है, जिससे सेप्सिस हो जाता है। यह स्थिति खून की कमी, आर्टरी ब्लॉकेज और ऑर्गन फेल्योर तक पहुंच सकती है, जो जानलेवा है।
कैसे करें बचाव?
डॉग-बाइट होने पर तुरंत घाव को साफ पानी और साबुन से धोएं।
समय पर मेडिकल ट्रीटमेंट और टिटनेस बूस्टर लें।
घाव में पस, सूजन या लालिमा दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
बुखार, कमजोरी या जलन जैसे लक्षण को नजरअंदाज न करें, यह सेप्सिस का संकेत हो सकता है।
पालतू और आवारा कुत्तों में फर्क
पालतू कुत्तों को ट्रेनिंग और वैक्सीन दी जाती है, जिससे उनके अटैक का खतरा और बीमारी फैलने की संभावना कम होती है। वहीं, आवारा कुत्ते अक्सर शिकारी प्रवृत्ति के होते हैं और हल्के खतरे पर भी हमला कर देते हैं। साथ ही, इनके वैक्सीनेटेड न होने के कारण रैबीज और सेप्सिस जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम लोगों की सुरक्षा के लिए अहम है। डॉग-बाइट को कभी भी हल्के में न लें और तुरंत सही उपचार कराएं, क्योंकि यह सिर्फ एक छोटे से घाव की बात नहीं, बल्कि जानलेवा खतरे की चेतावनी हो सकती है।