छींकने या खांसने पर निकल जाता है URINE,
कहीं आप भी तो नहीं है इस बीमारी से ग्रसित
30 days ago
Written By: anjali
जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, उनके शरीर में कई तरह के शारीरिक बदलाव होने लगते हैं। खासकर मेनोपॉज के बाद यह बदलाव और ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं। इन्हीं में से एक समस्या है यूट्राइन प्रोलैप्स (Uterine Prolapse), जिसे आम भाषा में बच्चेदानी का खिसकना कहा जाता है। यह समस्या तब होती है जब बच्चेदानी को सहारा देने वाली मसल्स और लिगामेंट्स कमजोर हो जाते हैं और यूट्रस नीचे की ओर खिसकने लगता है।
यूट्राइन प्रोलैप्स क्या है?
यूट्राइन प्रोलैप्स एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय (Uterus) अपनी सामान्य स्थिति से नीचे की ओर खिसक जाता है और कुछ मामलों में वजाइना (योनि) के बाहर तक आ जाता है। यह समस्या खासकर उन महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है जिनकी नॉर्मल डिलीवरी हो चुकी हो या जो मेनोपॉज की अवस्था में हों।
यूट्राइन प्रोलैप्स के स्टेज
स्टेज 1: यूट्रस वजाइना के ऊपरी हिस्से तक खिसकता है।
स्टेज 2: यूट्रस वजाइना के निचले हिस्से तक आ जाता है।
स्टेज 3: यूट्रस का कुछ भाग वजाइना से बाहर दिखाई देता है।
स्टेज 4: पूरा यूट्रस वजाइना से बाहर आ जाता है।
किन महिलाओं को होता है यूट्राइन प्रोलैप्स?
जिनकी एक या एक से अधिक बार नॉर्मल डिलीवरी हो चुकी हो
जो मेनोपॉज की अवस्था में हैं
जिनके परिवार में यह समस्या रही हो
जिनकी पहले पेल्विक सर्जरी हो चुकी हो
जिनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अधिक हो यानी मोटापा हो
यूट्राइन प्रोलैप्स के कारण
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी
मांसपेशियों और लिगामेंट्स का कमजोर होना
बार-बार गर्भधारण करना
बार-बार भारी सामान उठाना
लंबे समय तक कब्ज की समस्या
लगातार खांसी रहना
यूट्राइन प्रोलैप्स के लक्षण
निचले पेट या वजाइना में भारीपन या खिंचाव महसूस होना
कमर दर्द या पेल्विक पेन
वजाइना से मांस का टुकड़ा बाहर आना
सेक्स के दौरान दर्द होना
बार-बार पेशाब आना या पेशाब रोकने में परेशानी
छींकते या खांसते समय पेशाब का निकलना
टैम्पॉन इस्तेमाल करने में कठिनाई
चलने-फिरने या लंबे समय तक खड़े रहने पर लक्षण बढ़ जाना
बचाव के उपाय
भारी वजन उठाने से बचें
पेल्विक मसल्स को मजबूत बनाने के लिए केगेल एक्सरसाइज करें
संतुलित आहार लें ताकि शरीर में एस्ट्रोजन की कमी न हो
वजन को नियंत्रित रखें
पुरानी खांसी और कब्ज का इलाज करवाएं
Uterine Prolapse एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जिसे समय रहते पहचानकर इलाज किया जा सकता है। अगर आपको इसके लक्षण महसूस हों, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। सही जीवनशैली और सावधानियों से इस समस्या से बचा जा सकता है या इसके असर को कम किया जा सकता है।