कब होगा भगवान विष्णु का कल्कि आवतार…कहां होगा जन्म…क्या है यूपी से कनेक्शन,
एक क्लिक में जानें ये महत्वपूर्ण जानकारी
1 months ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
हिंदू धर्म में जब भी पाप और अधर्म का अंधकार घना हुआ है, तब-तब धर्म की पुनः स्थापना के लिए श्रीहरि विष्णु ने इस धरती पर अवतार लिया है। सतयुग में मत्स्य, कूर्म और वराह जैसे रूप धारण करने वाले विष्णु ने त्रेतायुग में राम के रूप में, और द्वापर में श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित होकर धर्म की रक्षा की। अब बचा है कलियुग और कलियुग के अंत की आहट तब सुनाई देगी, जब विष्णु अपने दसवें और अंतिम रूप में अवतरित होंगे कल्कि के रूप में।
हाथों में शंख नहीं तलवार लेकर आएंगे कल्कि
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कल्कि का जन्म कलियुग के उस क्षण में होगा, जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर होगा, जब मनुष्यता का पतन इतनी गहराई तक पहुंच जाएगा कि धर्म की पहचान धुंधली पड़ जाएगी। जब न्याय और नीति, पैसे और पाखंड के आगे सिर झुका देंगे, जब रिश्तों का मूल्य खो जाएगा और सत्य को हास्यास्पद बना दिया जाएगा तभी इस धरती पर पुनः ईश्वर अवतरित होंगे, पर इस बार वह हाथ में शंख या मुरली नहीं, बल्कि तलवार लेकर आएंगे। उनके आगमन से केवल एक धर्म युद्ध नहीं, बल्कि युग परिवर्तन की शुरुआत होगी।
क्या है यूपी का कल्कि कनेक्शन ?
कहा गया है कि कल्कि अवतार का जन्म उत्तर प्रदेश के संभल नामक स्थान में एक ब्राह्मण परिवार में होगा। उनके पिता का नाम विष्णुयशा और माता का नाम सुमति बताया गया है। यह भी उल्लेख है कि उनका जन्म सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होगा, जब कलियुग और सतयुग के बीच का संधिकाल होगा। वे एक साधारण बालक की तरह जन्म लेंगे लेकिन उनके भीतर वह दिव्य चेतना होगी, जो अधर्म के साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने के लिए पर्याप्त होगी।
चिरंजीवी परशुराम होंगे गुरु
कल्कि अवतार को लेकर एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि उनके गुरु परशुराम होंगे वही परशुराम, जो चिरंजीवी माने जाते हैं और आज भी धरती पर मौजूद हैं। परशुराम ही कल्कि को दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा देंगे और उन्हें युद्ध की कला सिखाएंगे। कल्कि न केवल एक महान योद्धा होंगे, बल्कि वे वेदों और शास्त्रों के ज्ञाता होंगे। उनका तेज ऐसा होगा कि उनके सामने कोई पाखंडी, कोई राक्षसी प्रवृत्ति, टिक नहीं पाएगी। वे 64 कलाओं में निपुण होंगे और उनका उद्देश्य केवल एक होगा पुनः धर्म की स्थापना।
कलियुग को समाप्त कर सतयुग की होगी स्थापना
कल्कि अवतार जब प्रकट होंगे, तो वे देवदत्त नामक सफेद घोड़े पर सवार होंगे। उनके हाथ में तलवार होगी, जो अधर्म का अंत करेगी। वह घोड़ा न सिर्फ उनकी गति का प्रतीक होगा, बल्कि उनकी दिव्यता का प्रतीक भी बनेगा। कल्कि केवल किसी राजा या योद्धा की भूमिका नहीं निभाएंगे, वे युगांतरकारी होंगे एक ऐसा अवतार, जो कलियुग को समाप्त कर सतयुग की पुनः स्थापना करेगा।
तीन भाइयों का मिलेगा साथ
यह भी कहा गया है कि कल्कि के तीन भाई होंगे, जो धर्म की स्थापना में उनका साथ देंगे। उनकी आयु 100 वर्षों से अधिक होगी, और इस अवतार का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरी मानवता पर होगा। धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि भगवान कल्कि का विवाह देवी लक्ष्मी के अवतार पद्मा से होगा। पद्मा, सिंहल द्वीप (आधुनिक श्रीलंका) के राजा वृहद्रथ और रानी कौमुदी की पुत्री होंगी। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि कल्कि का एक दूसरा विवाह देवी वैष्णवी (रमा) से होगा, जो शक्ति स्वरूपा मानी जाती हैं।