गणेश चतुर्थी पर कैसे करनी चाहिए मूर्ति की स्थापना,
कहां न रखें गणपति की मूर्ति
5 days ago
Written By: ANJALI
गणेशोत्सव का समय नज़दीक है और हर घर में बप्पा के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। गणपति जी न केवल विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माने जाते हैं, बल्कि उनका सही स्थान और स्वरूप घर की ऊर्जा और समृद्धि पर गहरा असर डालता है। वास्तु शास्त्र में गणेश जी की मूर्ति रखने से जुड़े कई खास नियम बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने घर में सकारात्मकता और शांति बढ़ा सकते हैं।
एक ही मूर्ति है शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में किसी भी देवी-देवता की केवल एक ही मूर्ति रखनी चाहिए। ज्यादा मूर्तियां ऊर्जा को बिखेर देती हैं और संतुलन बिगाड़ सकती हैं। अगर आपके पास गणपति की कई मूर्तियां हैं, तो उन्हें घर के अन्य हिस्सों में सजावट या प्रतीक के रूप में रखा जा सकता है, लेकिन पूजाघर में केवल एक ही मूर्ति स्थापित करनी चाहिए।
गणपति की दिशा और सूंड का महत्व
गणेश जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में रखना सबसे शुभ माना गया है। यहां स्थापना करने से आध्यात्मिक विकास और मानसिक शांति मिलती है।
उत्तर दिशा में रखने से बुद्धि और धन की वृद्धि होती है।
सूंड की दिशा भी बहुत मायने रखती है:
बाईं ओर सूंड (वाममुखी): शांति, सुख-समृद्धि और सामंजस्य लाती है।
दाईं ओर सूंड (दक्षिणमुखी): शक्ति, अनुशासन और तपस्या का प्रतीक, जो मंदिर या साधना स्थलों के लिए उपयुक्त है।
सीधी सूंड: संतुलन और तटस्थता का प्रतीक, खासकर कार्यस्थलों के लिए शुभ।
गणेश जी की मुद्रा और उनका असर
गणपति के अलग-अलग रूप और मुद्रा जीवन में अलग ऊर्जा लाते हैं।
बैठी हुई मुद्रा: स्थिरता, ध्यान और शांति का प्रतीक, जिसे पूजा घर या अध्ययन कक्ष में रखना चाहिए।
खड़ी हुई मुद्रा: ऊर्जा और प्रगति का प्रतीक, मुख्य द्वार पर स्थापित करने से शुभ फल मिलते हैं।
नृत्य मुद्रा: आनंद और रचनात्मकता का प्रतीक, कला या क्रिएटिव कार्यों वाले स्थान पर रखने से सकारात्मकता आती है।
कहां न रखें गणपति की मूर्ति
कुछ स्थान वास्तु के अनुसार अशुभ माने गए हैं। इन जगहों पर गणपति जी की मूर्ति या तस्वीर नहीं रखनी चाहिए:
शयनकक्ष, स्नानघर या शौचालय के पास
सीढ़ियों के नीचे
कचरे के पास
अंधेरे कोनों में
दक्षिणमुखी दीवार पर
मूर्ति की देखभाल भी है ज़रूरीगणपति जी की हर मूर्ति, चाहे वह धातु, पत्थर या सजावटी हो, सम्मान के योग्य है। उन्हें नियमित रूप से साफ करें और उनके स्थान का ध्यान रखें। सजावटी गणेश मूर्तियां पूजाघर में नहीं बल्कि घर के पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना बेहतर है। इससे स्थिरता और शक्ति का संतुलन बना रहता है। गणपति केवल पूजन के देवता ही नहीं, बल्कि घर में ऊर्जा और संतुलन के भी प्रतीक हैं। सही दिशा, मुद्रा और स्थान पर उनकी मूर्ति स्थापित करने से घर में खुशहाली, शांति और समृद्धि बढ़ती है। आने वाले गणेशोत्सव में अगर आप इन वास्तु नियमों का पालन करेंगे, तो बप्पा का आशीर्वाद आपके जीवन में और भी अधिक मंगलकारी होगा।