उत्तर प्रदेश के झांसी में है एक ऐसा अद्भुत मंदिर,
जहां स्त्री स्वरूप में पूजे जाते है हनुमान जी
24 days ago
Written By: anjali
जब हम हनुमान जी की कल्पना करते हैं, तो हमारे मन में उनका वीर, बलशाली और संकटमोचन रूप उभरता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के झांसी में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां हनुमान जी स्त्री स्वरूप में पूजित होते हैं। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहां भक्त बजरंगबली को "सखी रूप" में श्रद्धा अर्पित करते हैं। इस मंदिर को सखी के हनुमान मंदिर कहा जाता है।
मंदिर की खासियत: हनुमान जी का स्त्री रूप
देशभर में हनुमान जी के मंदिर उनके विभिन्न रूपों जैसे बाल हनुमान, पंचमुखी हनुमान या वीर रूप में मौजूद हैं, लेकिन झांसी का यह मंदिर अपने आप में एक अनोखा और रहस्यमय स्थान है। यहां हनुमान जी स्त्री भेष में, सखी के रूप में विराजमान हैं। भक्तजन उसी रूप में उन्हें श्रृंगारित करते हैं और स्त्री स्वरूप में पूजा करते हैं।
कहां स्थित है ये मंदिर?
यह मंदिर झांसी-कानपुर हाईवे पर स्थित है और दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां विशेष दर्शन के लिए आते हैं। यह स्थान केवल एक धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है।
सखी स्वरूप की पौराणिक कथा
करीब 500 वर्ष पहले ओरछा के एक संत सखी बाबा को एक दिव्य स्वप्न प्राप्त हुआ, जिसमें हनुमान जी स्त्री रूप में प्रकट हुए और आदेश दिया कि उनकी स्त्री प्रतिमा को एक विशेष स्थान पर स्थापित किया जाए। इस आदेश के अनुसार ही झांसी में इस मंदिर की स्थापना हुई।
यह मान्यता आनंद रामायण की एक चौपाई से भी पुष्टि प्राप्त करती है:
‘चारुशिला नामक सखी सदा रहत सिय संग, इत दासी उत दास हैं, त्रिया तन्य बजरंग।’
इससे यह संकेत मिलता है कि माता सीता की सेवा के लिए हनुमान जी ने स्त्री रूप धारण किया था और चारुशिला नामक सखी के रूप में उनके साथ रहीं।
हनुमान जयंती पर लगता है भव्य मेला
हर साल हनुमान जयंती के अवसर पर इस मंदिर में दो दिवसीय भव्य महोत्सव आयोजित होता है। इस दौरान विशेष पूजा, श्रृंगार, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया जाता है। पूरा परिसर भक्तों की भीड़ से भर जाता है और चारों ओर भक्ति की गूंज सुनाई देती है।
भक्तों की अटूट आस्था
यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि भावनात्मक रूप से भी हजारों भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। कहा जाता है कि जो भी यहां सच्चे मन से अपनी प्रार्थना लेकर आता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। स्त्री रूप में पूजित हनुमान जी की यह परंपरा भारत की आध्यात्मिक विविधता का एक सुंदर उदाहरण है।