पितरों के तर्पण और पिंडदान का क्या है महत्व,
जानिए क्या है इसकी मान्यता
20 days ago
Written By: anjali
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष भाद्रपद मास की अमावस्या शनिवार, 23 अगस्त 2025 को पड़ रही है। शनिवार को आने के कारण इसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। यह दिन पितरों को तर्पण और पिंडदान करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
गंगा स्नान और शिव अभिषेक का महत्व
इस दिन देशभर से श्रद्धालु गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान कर पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन का स्नान और पूजा पापों का नाश करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
पितरों के तर्पण और पिंडदान का महत्व
अमावस्या तिथि को पितरों का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है और व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि शनि अमावस्या पर बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं।
पितृ दोष निवारण स्तोत्र का पाठ
शास्त्रों में वर्णित पितृ दोष निवारण स्तोत्र का पाठ इस दिन विशेष फलदायी माना गया है। इस स्तोत्र के जप से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और उनकी कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
शनि अमावस्या पर करने योग्य कार्य
प्रातः स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
पवित्र नदी या कुएं के जल से भगवान शिव का अभिषेक करें।
पितरों का तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन कराएं।
पितृ दोष निवारण स्तोत्र का श्रद्धा भाव से पाठ करें।
गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और दान दें।
धार्मिक मान्यता
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, शनि अमावस्या पर किए गए पितृ कर्म का फल कई गुना बढ़ जाता है। यहां तक कि यदि श्राद्ध किसी कारणवश विधि-विधान से न भी हो पाए, तब भी इस दिन पितृ स्तोत्र का पाठ करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और वे आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
इस प्रकार, शनिवार 23 अगस्त की शनि अमावस्या पितरों की कृपा, शनि देव के आशीर्वाद और जीवन में समृद्धि पाने का एक उत्तम अवसर है। श्रद्धा और भक्ति से किए गए कर्म इस दिन विशेष फलदायी होते हैं।