आज लगेगा सूर्य ग्रहण,
जानिए क्या है इसका पूरी सच
28 days ago
Written By: anjali
सूर्य ग्रहण एक रोचक खगोलीय घटना है, जिसका वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है। सूर्य ग्रहण कई प्रकार के होते हैं – आंशिक, वलयाकार और पूर्ण। इनमें से पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि 2 अगस्त 2025 को सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण लगने वाला है, लेकिन यह दावा सही नहीं है। वास्तव में यह ऐतिहासिक ग्रहण 2 अगस्त 2027 को लगेगा।
क्या है इस सूर्य ग्रहण की खासियत?
NASA के मुताबिक, 2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। यह ग्रहण सामान्य पूर्ण ग्रहणों से कहीं अधिक समय तक चलेगा — लगभग 6 मिनट 23 सेकंड तक सूर्य पूरी तरह अंधकार में रहेगा। आमतौर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण 2 से 4 मिनट तक ही रहता है, इसलिए यह ग्रहण विशेष खगोलीय घटना मानी जा रही है।
ग्रहण क्यों रहेगा इतना लंबा?
इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के बेहद करीब, यानी पेरिजी (Perigee) स्थिति में होगा। साथ ही पृथ्वी अपने अफेलियन (Aphelion) के पास होगी, यानी सूर्य से सबसे दूर। ऐसे में चंद्रमा आकाश में अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देगा और वह सूर्य को पूरी तरह और लंबे समय तक ढक सकेगा।
कहां से देखा जा सकेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
यह दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण निम्नलिखित देशों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा:
स्पेन
जिब्राल्टर
अलजीरिया
मोरक्को
ट्यूनिशिया
लिब्या
सऊदी अरब
येमेन
सूडान
मिस्र
सोमालिया
इन क्षेत्रों में कुछ मिनटों के लिए दिन में अंधेरा छा जाएगा।
भारत में सूर्य ग्रहण का दृश्य कैसा होगा?
भारत में यह सूर्य ग्रहण पूर्ण रूप से नहीं देखा जा सकेगा, लेकिन इसका आंशिक प्रभाव कुछ हिस्सों में जरूर नजर आएगा। खासतौर पर:
राजस्थान
गुजरात
महाराष्ट्र
गोवा
इन राज्यों में सूर्य का कुछ भाग चंद्रमा द्वारा ढका हुआ दिखाई देगा।
समय: भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण शाम 4 बजे से 6 बजे के बीच देखा जा सकेगा।
2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण एक ऐतिहासिक खगोलीय घटना होगी, जिसे “Eclipse of the Century” कहा जा रहा है। यह न केवल विज्ञान के नजरिए से बल्कि सामान्य जनजीवन में भी उत्सुकता का विषय रहेगा। हालांकि भारत में इसे आंशिक रूप से ही देखा जा सकेगा, लेकिन यह दृश्य फिर भी बेहद आकर्षक और अद्वितीय होगा।67