पंचायत सीरीज के बाद 21 दिनों में जीती सिगरेट से जंग…
दामाद जी ने छोड़ी स्मोकिंग…आसिफ खान ने खोला राज…
27 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
'पंचायत' वेब सीरीज में ‘दामाद जी’ के किरदार से घर-घर में पहचान बना चुके एक्टर आसिफ खान ने अपनी जिंदगी में एक ऐसा कदम उठाया है जो न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हुआ, बल्कि उनके फैंस के लिए भी प्रेरणा बन गया है। कुछ हफ्ते पहले अस्पताल में भर्ती होने के बाद, आसिफ ने स्मोकिंग छोड़ने का संकल्प लिया और आज उन्हें ये आदत छोड़े पूरे 21 दिन हो गए हैं।
जब अस्पताल बना जिंदगी का आईना
आसिफ को हाल ही में अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें हार्ट अटैक हुआ है, लेकिन डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि ये गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लेक्स डिजीज (GERD) था, जिसकी वजह से उन्हें हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस हुए। इस अनुभव ने आसिफ को सोचने पर मजबूर कर दिया और यहीं से उनके जीवन में बड़ा बदलाव शुरू हुआ।
इंस्टाग्राम पर शेयर की भावुक पोस्ट
‘फ्रेंडशिप डे’ के मौके पर आसिफ ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए अपनी स्मोकिंग छोड़ने की उपलब्धि को साझा किया। उन्होंने लिखा,“कहते हैं कि 21 दिन में कोई भी आदत छूट सकती है। आज मुझे स्मोकिंग छोड़े 21 दिन पूरे हो गए हैं। इस फ्रेंडशिप डे पर मैं अपने दोस्तों को बताना चाहता हूं कि मैं उनसे कितना प्यार करता हूं।” आसिफ की यह पोस्ट न केवल आत्मनिरीक्षण की कहानी है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए एक सीख भी है, जो बुरी आदतों के चंगुल में फंसकर अपनी सेहत से समझौता करते हैं।
दोस्ती, जिंदगी और सादगी का संदेश
आसिफ ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “जिंदगी में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं। जब आप ऊंचाइयों पर होते हैं तो लोग आपके साथ होते हैं, लेकिन मुश्किल वक्त में जो साथ दे, वही सच्चा दोस्त है। अपनी गलतियों को समझने के लिए अस्पताल के बिस्तर पर जाने का इंतजार न करें। बड़े शहरों की चकाचौंध में खोने की बजाय, अपनी सादगी और सरलता को हमेशा बनाए रखें।”
अब सेहत है बेहतर, दिल है हल्का
आसिफ ने बताया कि अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और घर पर आराम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंस्टाग्राम पर शेयर की गई तस्वीरें पुरानी हैं। एक मजाकिया लेकिन गहरी सीख के अंदाज में उन्होंने लिखा,“चाय पीने वालों को देखकर ब्लैक कॉफी मत पीने लगो। दोस्तों से रोज मिलो, लेकिन जिंदगी को 20-30 रुपये की चीजों के पीछे मत दांव पर लगाओ। शायद भविष्य में मैं अपनी इस बात पर हंसूंगा।”
आसिफ की बातों में छिपा है सबक
आसिफ खान की यह यात्रा सिर्फ एक अभिनेता की नहीं है, बल्कि हर उस इंसान की है जो अपने भीतर झांकने की हिम्मत करता है। उनका यह फैसला दिखाता है कि बदलाव मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। और अगर इस बदलाव से किसी की जान बच जाए या कोई प्रेरित हो जाए, तो शायद यही सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।