Kishor kumar Birth Anniversery: आखिर क्यों कांग्रेस ने बैन कर दी थी किशोर कुमार की आवाज,
जानिए पूरा किस्सा
27 days ago
Written By: anjali
25 जून 1975... भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का वह दिन जिसे "सबसे काला दिन" कहा जाता है। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा की थी। इस निर्णय ने न केवल आम नागरिकों के अधिकार छीन लिए, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी कठोर पहरा बैठा दिया गया। अखबारों पर सेंसरशिप लागू कर दी गई और जो भी सरकार के खिलाफ बोलता, उसे जेल भेज दिया जाता। इस दौर में बॉलीवुड भी सरकार के शिकंजे से अछूता नहीं रहा। इसी दौर में एक घटना घटी, जिसने गायक और अभिनेता किशोर कुमार को सत्ता के सामने खड़ा कर दिया — और इसकी उन्हें भारी कीमत भी चुकानी पड़ी।
सरकार को चाहिए थी ‘जनता की आवाज’
आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने कई सरकारी योजनाओं और घोषणाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए एक लोकप्रिय आवाज की तलाश की। उस समय किशोर कुमार न सिर्फ एक सुपरहिट गायक थे बल्कि जनता के बीच बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व भी थे। सरकार चाहती थी कि किशोर कुमार अपने गीतों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का प्रचार करें। इसी मकसद से सूचना और प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला ने किशोर कुमार तक संदेश भिजवाया। उनसे अनुरोध किया गया कि वे इंदिरा गांधी सरकार के लिए प्रचार गीत गाएं।
जब किशोर कुमार ने कहा ‘ना’
लेकिन यह प्रस्ताव किशोर कुमार को रास नहीं आया। जब संदेशवाहक ने कहा कि यह “आदेश” है, तो किशोर कुमार नाराज़ हो गए। उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि वह कोई आदेश पर काम करने वाले कलाकार नहीं हैं। उन्होंने गाना गाने से साफ इंकार कर दिया और सरकार की बात को ठुकरा दिया।
सरकार ने लिया बदला: रेडियो और टीवी से बैन
किशोर कुमार के इस विरोध का सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया। 3 मई 1976 से ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर उनके सभी गानों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई। यह बैन आपातकाल समाप्त होने तक जारी रहा। सरकार का यह रवैया यह दिखाता है कि कैसे एक कलाकार की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश की गई — लेकिन किशोर कुमार ने अपनी आवाज की आज़ादी से समझौता नहीं किया।