2022 की तुलना में दस गुना बढ़ा डिजिटल फ्रॉड…
आप भी हो जाएं सावधान…दिमाग हिला देंगे ये आकड़े...
29 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
भारत में साइबर अपराध एक विकराल संकट बनता जा रहा है। दिल्ली की मीडिया और टेक कंपनी डेटालीड्स की ताजा रिपोर्ट ने साइबर फ्रॉड के आंकड़ों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में देश को ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल जालसाजी के चलते 22,842 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। यह आंकड़ा 2023 के मुकाबले लगभग तीन गुना और 2022 की तुलना में दस गुना अधिक है।
हर साल कई गुना बढ़ रहा नुकसान
डेटालीड्स की रिपोर्ट "Contours of Cybercrime: Persistent and Emerging Risk of Online Financial Frauds and Deepfakes in India" के मुताबिक,
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2022 में साइबर अपराध से 2,306 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
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2023 में यह बढ़कर 7,465 करोड़ तक पहुंच गया।
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और अब 2024 में 22,842 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।
यह साफ संकेत है कि साइबर ठग हर साल अधिक सक्रिय और संगठित होते जा रहे हैं।
I4C का अनुमान: 2025 तक 1.2 लाख करोड़ का नुकसान संभव
गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) का मानना है कि मौजूदा रफ्तार से अगर साइबर फ्रॉड की घटनाएं बढ़ती रहीं, तो इस साल (2025) भारतीयों को 1.2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट बताती है कि अकेले 2024 में ही लगभग 20 लाख साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज की गई हैं, जो पिछले साल की 15.6 लाख शिकायतों से भी ज्यादा हैं।वहीं अगर 2019 की तुलना करें, तो तब की शिकायतों के मुकाबले यह संख्या अब दस गुना हो चुकी है।
बेरोजगारी और डिजिटल अपराधियों की बढ़ती संख्या
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 290 लाख बेरोजगार युवा हैं और डिजिटल क्राइम करने वाले अपराधी तकनीकी रूप से काफी होशियार होते जा रहे हैं। यही कारण है कि अपराध का तरीका जितना स्मार्ट हो रहा है, उसका असर और नुकसान उतना ही गंभीर।
बैंकिंग फ्रॉड के आंकड़े भी डराने वाले
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 के पहले छह महीनों में बैंक धोखाधड़ी के मामलों में भारी उछाल देखा गया है:
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फ्रॉड की घटनाएं पिछले साल के मुकाबले आठ गुना बढ़ गई हैं।
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इन फ्रॉड से हुआ नुकसान 2,623 करोड़ से बढ़कर 21,367 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
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60% धोखाधड़ी प्राइवेट बैंकों से संबंधित है।
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लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान 25,667 करोड़ रुपये, सरकारी बैंकों के ग्राहकों को हुआ है।