नहीं रहे पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक…
सबसे अहम रहा जम्मू कश्मीर का कार्यकाल, बदल डाला था नक्शा…
26 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निजी सचिव पीएस राणा ने उनके निधन की पुष्टि की। मलिक बिहार, गोवा, जम्मू-कश्मीर और मेघालय के राज्यपाल रह चुके थे। बीते कुछ वर्षों में वह केंद्र सरकार, विशेष रूप से मोदी सरकार के मुखर आलोचकों में गिने जाने लगे थे।
सोशल मीडिया पर साझा किया था हेल्थ अपडेट
आपको बताते चलें कि गत 8 जून को सत्यपाल मलिक ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी तबीयत के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा था कि वह बीते एक महीने से अस्पताल में भर्ती हैं और किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी, जिसे उन्होंने खुद भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था।
लंबे राजनीतिक जीवन की शुरुआत समाजवाद से
सत्यपाल मलिक ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 के दशक में एक समाजवादी नेता के रूप में की थी। 1974 में वह भारतीय क्रांति दल के टिकट पर उत्तर प्रदेश की बागपत सीट से विधायक चुने गए। बाद में वह लोकदल के महासचिव बने और 1980 से 1989 तक उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य भी रहे।
गोवा से मेघालय तक का राज्यपाल कार्यकाल
जम्मू-कश्मीर के बाद मलिक को गोवा का राज्यपाल बनाया गया, जहां से बाद में उनका तबादला मेघालय हुआ। वह अक्तूबर 2022 तक मेघालय के राज्यपाल के रूप में कार्यरत रहे। उनके कार्यकाल के अंतिम वर्षों में उन्होंने किसान आंदोलन और अन्य मुद्दों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखे हमले किए, जिससे वे राष्ट्रीय सुर्खियों में बने रहे।
अनुच्छेद 370 हटने के समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे
सत्यपाल मलिक का कार्यकाल जम्मू-कश्मीर के इतिहास के सबसे अहम फैसलों में से एक का गवाह बना। अगस्त 2018 से अक्तूबर 2019 तक वह राज्यपाल रहे और उसी दौरान 5 अगस्त 2019 को संसद में अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा हुई, जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो गया। दिलचस्प बात यह है कि मलिक का निधन उस दिन हुआ, जब अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के छह साल पूरे हुए।