भारतीय डाक सेवा में ऐतिहासिक बदलाव,
रजिस्टर्ड पोस्ट बंद…भरोसे की चिट्ठी ने कहा अलविदा…
27 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
भारतीय डाक विभाग ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा को बंद करने की घोषणा कर दी है। एक सितंबर 2025 से यह सेवा चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दी जाएगी और इसे स्पीड पोस्ट में समाहित कर दिया जाएगा। आधुनिकीकरण और संचालन में दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया यह फैसला न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी करोड़ों भारतीयों के लिए एक युग के अंत जैसा है।
क्या थी रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा
बीते पांच दशकों से रजिस्टर्ड पोस्ट आम नागरिकों, किसानों, छोटे व्यापारियों और सरकारी संस्थानों के लिए दस्तावेज़ों की सुरक्षित और सस्ती डिलीवरी का ज़रिया रहा है। यह सेवा नौकरी की पेशकश, कानूनी नोटिस, सरकारी पत्राचार और शैक्षिक दस्तावेजों के आदान-प्रदान में खास महत्व रखती थी। इसकी कानूनी मान्यता के चलते अदालतों में सबूत के तौर पर इसकी स्वीकार्यता थी।
गिरता उपयोग और डिजिटल युग की चुनौती
डाक विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में जहां 244.4 मिलियन रजिस्टर्ड पोस्ट भेजे गए थे, वहीं 2019-20 में यह संख्या घटकर 184.6 मिलियन रह गई। डिजिटल माध्यमों की बढ़ती स्वीकार्यता और निजी कोरियर सेवाओं की प्रतिस्पर्धा ने इस गिरावट को और तेज किया। इसी पृष्ठभूमि में विभाग ने रजिस्टर्ड पोस्ट को स्पीड पोस्ट में मर्ज करने का निर्णय लिया है।
स्पीड पोस्ट में विलय
स्पीड पोस्ट, जो 1986 से संचालित है, अब रजिस्टर्ड पोस्ट की जगह लेगी। इससे डिलीवरी में तेजी, ट्रैकिंग की सटीकता और संचालन में कुशलता आएगी। सभी सरकारी कार्यालयों, अदालतों, शैक्षणिक संस्थानों और उपयोगकर्ताओं को 1 सितंबर तक इस बदलाव के लिए तैयार रहने को कहा गया है। हालांकि, यह भी सच है कि स्पीड पोस्ट रजिस्टर्ड पोस्ट की तुलना में महंगी है। जहां रजिस्टर्ड पोस्ट की शुरुआती दर ₹25.96 थी (20 ग्राम तक ₹5 अतिरिक्त), वहीं स्पीड पोस्ट की शुरुआती दर ₹41 (50 ग्राम तक) है। यह कीमत ग्रामीण भारत के लिए 20-25% अधिक बोझ बन सकती है, जहां डाकघर आज भी संचार का प्रमुख माध्यम हैं।
गांव और बुजुर्गों में भावनात्मक जुड़ाव
रजिस्टर्ड पोस्ट केवल एक सेवा नहीं थी, यह एक भरोसे की डोर थी जो दशकों तक लोगों की भावनाओं से जुड़ी रही। खासकर ग्रामीण भारत और बुजुर्ग वर्ग के लिए यह सेवा भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण थी। स्पीड पोस्ट में भले ही ट्रैकिंग और डिलीवरी की पुष्टि जैसी सुविधाएं बनी रहेंगी, पर रजिस्टर्ड पोस्ट के जाने से दिलों में एक खालीपन जरूर रह जाएगा।
एक युग का अंत, एक नए युग की शुरुआत
ब्रिटिश काल से चली आ रही यह सेवा न केवल ऐतिहासिक थी, बल्कि कानूनी, शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे का एक अभिन्न हिस्सा भी रही। बैंकों, अदालतों, विश्वविद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में इसके प्रयोग ने इसे भारत की संचार व्यवस्था की रीढ़ बना दिया था। अब जबकि यह सेवा आधिकारिक रूप से बंद होने जा रही है, इसे याद करना लाज़िमी है। एक ऐसी व्यवस्था, जिसने लाखों लोगों को समय पर सूचना, न्याय और अवसर पहुंचाए।