ICICI Bank की मिनिमम बैंक बैलेंस नीति से मचा बवाल…
एक माह में कम से कम रखने होंगे इतने रूपए…
21 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
ICICI Bank अपने बचत खातों के नियमों में बड़े बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर घिर गया है। बैंक ने मेट्रो और शहरी इलाकों के ग्राहकों के लिए न्यूनतम औसत मासिक बैलेंस की सीमा 10 हज़ार रुपये से बढ़ाकर सीधे 50 हज़ार रुपये कर दी है। यानी अब इन खातों में हर महीने औसतन पचास हज़ार रुपये रखना अनिवार्य होगा।
सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा
इस फैसले को लेकर इंटरनेट के एक बड़े वर्ग ने ICICI Bank की जमकर आलोचना की है। यूट्यूबर अनुज प्रजापति ने इसे बैंक का "सबसे खराब फैसला" बताया। कई लोगों ने इसे मध्यम वर्ग पर एक और बोझ करार दिया। एक यूज़र ने लिखा, "1 लाख रुपये महीने कमाने वालों के पास भी 50 हज़ार का औसत बैलेंस नहीं होगा, क्योंकि EMI, बिल, लोन और क्रेडिट कार्ड पेमेंट जैसी ज़रूरतें होती हैं। हर सेक्टर का ध्यान सिर्फ मध्यम वर्ग को लूटने पर है। गरीब तो इनके लिए बस चलते-फिरते मृतक हैं और सरकार भी यही चाहती है।" एक अन्य यूज़र ने तंज कसा, "ICICI Bank ने बचत खाता भी लक्ज़री आइटम बना दिया है।"
नेताओं और आम जनता की प्रतिक्रिया
कांग्रेस की शमा मोहम्मद ने इसे "मध्यम वर्ग के लिए एक और झटका" कहा और लिखा, "अब लोग इतना बड़ा बैलेंस न रखने पर पेनल्टी भरेंगे।" वहीं कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जिनके पास हर महीने 50 हज़ार रुपये फालतू पड़े हों, वे क्यों इतनी कम ब्याज देने वाले बचत खाते में पैसा रखेंगे। एक यूज़र ने कहा, "2025 में शहरी युवा अपना पैसा 3% ब्याज पर सड़ने के लिए नहीं रखेंगे। वे निवेश करना चाहते हैं, बढ़ना चाहते हैं, और संपत्ति बनाना चाहते हैं — सिर्फ बैंकों को अमीर बनाने के लिए नहीं।" एक और प्रतिक्रिया में लिखा गया, "एक ऐसे देश में जहां 90% भारतीयों की आय 27 हज़ार रुपये से कम है, वहां 50 हज़ार रुपये का न्यूनतम बैलेंस… यह तो अमीरों के लिए, अमीरों द्वारा, अमीरों का फैसला है।"
कुछ ने किया समर्थन
हालांकि, कुछ यूज़र्स ने बैंक के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि एक निजी बैंक होने के नाते ICICI को अपने नियम बनाने का पूरा अधिकार है। समर्थकों ने यह भी जोड़ा कि यह बढ़ोतरी मौजूदा ग्राहकों पर लागू नहीं होगी, इसलिए उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।