जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव…स्पीकर ओम बिरला ने बनाई कमेटी…
यहां देखें सदस्यों के…
19 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
कैश कांड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार (12 अगस्त) को उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव पर कुल 146 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेता शामिल हैं। स्पीकर ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है और सदस्यों के नाम भी घोषित कर दिए हैं।
जांच पूरी होने तक लंबित रहेगा प्रस्ताव
दरअसल इस गठित कमेटी में तीन प्रमुख लोग हैं। जिनमे सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, कर्नाटक हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट बीबी आचार्य और मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। जांच पूरी होने तक महाभियोग प्रस्ताव लंबित रहेगा।
कैसे शुरू हुआ विवाद
14 मार्च को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पा लिया। इसके बाद उनके स्टोर रूम से 500-500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल मिले, जो बोरे में भरे हुए थे। यह खुलासा चौंकाने वाला था और इसी के बाद मामले ने तूल पकड़ा। जस्टिस वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उनके घर या स्टोर में नकदी नहीं थी और उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। इसके कुछ दिनों बाद, 28 मार्च को उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया।
क्या है महाभियोग प्रक्रिया
किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए संसद के किसी भी सदन में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। यह प्रस्ताव सबसे पहले राज्यसभा के सभापति या लोकसभा स्पीकर के समक्ष पेश किया जाता है। इसके बाद प्रस्ताव की जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाती है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट का एक जज, किसी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस और एक विशिष्ट विधि विशेषज्ञ शामिल होते हैं।