ट्रंप के टैरिफ वार पर PM मोदी का दो-टूक…
किसानों और मछुआरों के हितो पर समझौता नहीं करेगा भारत…
24 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मंच से अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने के मुद्दे पर सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत किसानों, मछुआरों और डेयरी उत्पादकों के हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए कितनी भी भारी कीमत चुकानी पड़े।
PM मोदी का दो टूक
दरसल ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसपर पलटवार करते हुए कहा है कि, “हमारे लिए किसानों का हित सर्वोच्च है। भारत कभी किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा। मुझे पता है कि इसके लिए हमें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। भारत इसके लिए तैयार है।”
अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50% तक बढ़ाया
पीएम मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% आयात शुल्क लगाने का आदेश जारी किया है। इससे अब कुल टैरिफ 50% हो गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि भारत का रूस से तेल खरीदना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए "असामान्य और असाधारण खतरा" है। इसी आधार पर व्यापार कानूनों और विदेश नीति चिंताओं का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह नया शुल्क 7 अगस्त से लागू हो गया है और अतिरिक्त शुल्क 21 दिन बाद से प्रभावी होगा। इसमें कुछ छूट भी शामिल हैं। जैसे कि, जो सामान पहले से ट्रांजिट में हैं या जो विशिष्ट मापदंडों को पूरा करते हैं।
कृषि क्षेत्र में अमेरिकी दबाव को भारत ने नकारा
व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिका ने भारत के कृषि बाजार में अधिक पहुंच की मांग की थी, खासकर मक्का, सोयाबीन और कपास जैसे उत्पादों के लिए। लेकिन भारत ने अब तक घरेलू आजीविका और किसानों पर प्रभाव को देखते हुए कृषि और डेयरी क्षेत्रों को खोलने से इनकार कर दिया है।
एमएस स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय कृषि के जनक एमएस स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि दी और उनके सम्मान में स्मृति सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। एमएस स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है। उन्होंने 1960 के दशक में उच्च उपज वाली गेहूं की किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया। उनका जन्म 7 अगस्त 1925 को कुंभकोणम में हुआ था और उनका निधन 28 सितंबर 2023 को चेन्नई में हुआ।