तेजी से बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत..!
रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से बाजार में हडकंप…
29 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
दुनिया के दो ताकतवर देश रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई में रुकावट आने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे कीमतें आसमान छूने को तैयार हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में ऑयल मार्केट विशेषज्ञों ने चेताया है कि आने वाले महीनों में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है।
2025 के अंत तक और महंगा हो सकता है कच्चा तेल
वेंचुरा कमोडिटीज के सीआरएम हेड एनएस रामास्वामी के मुताबिक, ब्रेंट ऑयल (अक्टूबर 2025) की कीमत फिलहाल 72.07 डॉलर प्रति बैरल है, जो जल्द ही 76 डॉलर तक पहुंच सकती है। उनका मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव इसी तरह जारी रहा, तो 2025 के अंत तक कीमतें 80 से 82 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इस तनाव के मूल में है अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम। ट्रंप ने रूस को यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए 10-12 दिन की डेडलाइन दी है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो रूस से व्यापार करने वाले देशों पर सेकेंडरी टैरिफ और अन्य प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर पड़ेगा।
रूस से तेल लो या अमेरिका की सजा झेलो ?
ट्रंप के रुख ने वैश्विक बाजारों के सामने एक दोधारी चुनौती खड़ी कर दी है। या तो देश सस्ते दामों में रूस से कच्चा तेल लें, या फिर अमेरिका के भारी-भरकम एक्सपोर्ट टैक्स का सामना करें। इस बीच, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल, जो सितंबर 2025 के लिए 69.65 डॉलर प्रति बैरल पर है, 73 डॉलर तक पहुंच सकता है। साल के अंत तक इसमें और इजाफा हो सकता है और 76-79 डॉलर तक भाव जा सकता है, जबकि निचले स्तर पर 65 डॉलर का समर्थन बना रह सकता है।
2026 तक कीमतें ऊंची रह सकती हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में तेल उत्पादन की क्षमता पर असर पड़ेगा। सप्लाई घटेगी तो कीमतें और चढ़ेंगी। ऐसे में 2026 तक भी कीमतों के ऊंचे बने रहने की संभावना जताई जा रही है। एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने एएनआई को बताया, “रूस हर दिन वैश्विक तेल आपूर्ति व्यवस्था में 50 लाख बैरल तेल निर्यात करता है। अगर उसे इस चक्र से बाहर कर दिया गया, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी ज्यादा हो सकती हैं।”