देश में फेल साबित हो रही कौशल विकास योजना..!
ट्रेनिग तो मिली…लेकिन अभी भी नौकरी से वंचित हैं 85 % युवा…
26 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
देश में बेरोजगारी अब भी बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत लाखों युवाओं को प्रशिक्षण तो दिया गया, लेकिन रोजगार मिलने की रफ्तार अभी भी बेहद धीमी है। हाल ही में लोकसभा में साझा किए गए आंकड़े बताते हैं कि योजना के तहत ट्रेनिंग पाने वाले युवाओं में से महज एक छोटी संख्या को ही रोजगार मिल पाया है।
1.6 करोड़ को प्रशिक्षण, नौकरी सिर्फ 24.3 लाख को
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया है कि वर्ष 2015 से अब तक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के पहले तीन चरणों के तहत पूरे देश में 1.6 करोड़ से अधिक युवाओं को स्किल ट्रेनिंग दी गई है। इसके बावजूद, केवल 24.3 लाख प्रशिक्षित युवाओं को ही रोजगार मिल सका है, जो कुल प्रशिक्षित लोगों का 15% से भी कम है।
मौजूदा चरण में फोकस बदला
वर्तमान में चल रहे योजना के चौथे चरण (PMKVY 4.0) में सरकार ने प्लेसमेंट ट्रैकिंग के बजाय युवाओं को विभिन्न करियर विकल्पों के लिए तैयार करने पर ज्यादा जोर दिया है। इसके लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए युवाओं को नियोक्ताओं से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही जॉब फेयर और नेशनल अप्रेंटिसशिप फेयर जैसे माध्यमों से भी रोजगार को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
ट्रेनिंग और इंडस्ट्री के बीच तालमेल की कमी
विश्लेषकों का मानना है कि कम प्लेसमेंट रेट इस बात को दर्शाता है कि ट्रेनिंग का सिलेबस अब भी इंडस्ट्री की मांगों के अनुसार नहीं है। 2015 से 2022 के बीच अल्पकालिक प्रशिक्षण (STT) के तहत 56.89 लाख उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र मिले, लेकिन इनमें से केवल 24.3 लाख को ही नौकरी मिली, यानी लगभग 43% का ही प्लेसमेंट हुआ। सरकार ने इस खामी को स्वीकारते हुए लोकल डिमांड और इंडस्ट्री ट्रेंड्स के अनुसार ट्रेनिंग कार्यक्रमों को ढालने का संकल्प लिया है। इसके तहत जिला स्तर पर स्किल गैप स्टडी और राज्य-विशिष्ट ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए गए हैं।
रोजगार नहीं तो स्वरोजगार ही सही
सरकार का जोर अब स्वरोजगार को भी बढ़ावा देने पर है। इसके लिए युवाओं को कई वित्तीय योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। जिसके तहत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 35.13 लाख करोड़ रुपये की स्वीकृति, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 3,920 करोड़ रुपये तो DAY-NULM योजना के तहत शहरी गरीबों को 8,775 करोड़ रुपये की सहायता की स्वीकृति दी गई है। वहीं तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश दोनों ही राज्यों ने ट्रेनिंग एनरोलमेंट और लोन सपोर्ट में सबसे आगे की भूमिका निभाई है।
क्वालिटी सुधार की दिशा में प्रयास
योजना के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए कुछ अहम सुधार किए जा रहे हैं, जैसे- केवल मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण, कार्यस्थल पर व्यावहारिक ट्रेनिंग, राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क का विकास, रेगुलर थर्ड पार्टी असेसमेंट, PMKVY 4.0 का तीसरे पक्ष द्वारा मूल्यांकन फिलहाल जारी।