दुश्मनों का काल बनेगा सेना का नया भैरव और रूद्र बटालियन…
अब हवा से रिपु-नाश करेंगे भारत के फौजी ड्रोन…
27 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया, लेकिन पाकिस्तान, तुर्की और चीन के संयुक्त हथियारों और तकनीक के इस्तेमाल ने एक नई तरह की चुनौती जरूर खड़ी कर दी। युद्ध के मैदान में भले ही भारत को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन जिस ढंग से दुश्मन ने ड्रोन और हाई-टेक उपकरणों से माहौल बनाने की कोशिश की, उसने आने वाले समय के लिए भारतीय सेना को रणनीतिक रूप से और सतर्क कर दिया है। इसी के तहत अब सेना ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
ड्रोन युद्ध की तैयारी: अब बटालियन स्तर पर तैनाती
भारतीय सेना अब बटालियन स्तर पर ड्रोन (यूएवी) और काउंटर-ड्रोन तकनीक को तैनात करने की तैयारी में है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना की योजना है कि हर बटालियन में ऐसे सैनिक हों जो ड्रोन चलाने और ड्रोन गतिविधियों पर निगरानी रखने में पूरी तरह प्रशिक्षित हों। सेना की हर यूनिट को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर पर ऐसी टीम तैयार करें जो ड्रोन संचालन और निगरानी में पूरी तरह पारंगत हो। इन्फेंट्री में भी अब प्लाटून और कंपनी स्तर पर कई निगरानी ड्रोन शामिल किए जाएंगे। इससे सीमावर्ती और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता कहीं ज्यादा प्रभावी हो जाएगी।
‘भैरव बटालियन’ से बदलेगा खेल
ड्रोन संचालन और विशेष ऑपरेशनों के लिए सेना 30 नई लाइट कमांडो बटालियन बनाने जा रही है, जिन्हें ‘भैरव’ के नाम से जाना जाएगा। प्रत्येक बटालियन में करीब 250 जवान होंगे। इन्हें खास इलाकों में तैनात किया जाएगा और मिशन के मुताबिक इनकी जिम्मेदारियां और उपकरण तय किए जाएंगे। भैरव बटालियन को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि वे हर प्रकार की भौगोलिक और सामरिक चुनौती का सामना कर सकें, चाहे वो रेगिस्तान हो, पहाड़ या फिर शहरी इलाके।
‘रुद्र ब्रिगेड’ भी होगी मैदान में
सेना का अगला बड़ा कदम ‘रुद्र ब्रिगेड’ की स्थापना है। यह एक ऑल-आर्म्स इंटीग्रेटेड ब्रिगेड होगी जिसमें न सिर्फ ड्रोन और अन्य एडवांस उपकरण होंगे, बल्कि पारंपरिक और हाइब्रिड युद्ध के लिए विशेष रूप से तैयार की गई टीम भी होगी। इन ब्रिगेड्स को हर उस परिस्थिति में तैनात किया जा सकेगा जहां पारंपरिक और आधुनिक युद्ध तकनीकों की ज़रूरत हो।
एक महीने में तैयार होंगी नई यूनिट्स
इन्फेंट्री रेजिमेंटल सेंटर्स को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे 'भैरव' बटालियनों के गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें। अनुमान है कि एक महीने के भीतर ये बटालियनें तैनाती के लिए भी तैयार हो जाएंगी।