दुनिया खतरे में हैं इस लिये माता सीता, भगवान राम और कौवा मांग रहे निवास प्रमाण पत्र..!
सरकारी पोर्टल पर तस्वीरों के साथ आवेदन से मचा हडकंप…
26 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
बिहार की ऑनलाइन सरकारी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। RTPS पोर्टल पर निवास प्रमाणपत्र बनवाने को लेकर जो ताज़ा मामला सामने आया है, वो प्रशासनिक कार्यशैली और डिजिटल निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस बार खगड़िया जिले के दो अलग-अलग अंचल कार्यालयों में कौआ, भगवान श्रीराम और माता सीता के नाम से आवेदन किया गया है। वो भी बाकायदा तस्वीरों के साथ।
'डॉग बाबू' के बाद अब 'कौआ' की एंट्री
पहला मामला खगड़िया सदर अंचल कार्यालय से जुड़ा है। यहां निवास प्रमाणपत्र के लिए एक ऑनलाइन आवेदन आया जिसमें आवेदक का नाम कौआ, पिता का नाम कौआ सिंह और माता का नाम मैना सिंह दर्ज किया गया। गांव बताया गया, भदास, जिला खगड़िया। इतना ही नहीं, आवेदन पर कौए की असली तस्वीर भी अपलोड की गई थी। यह आवेदन 12 दिसंबर 2024 को RTPS पोर्टल के जरिए किया गया था, जिसे खगड़िया अंचलाधिकारी अमीर हुसैन ने तुरंत खारिज कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व अधिकारी शंभू कुमार की ओर से कांड संख्या 82/2025 के तहत अज्ञात पर चित्रगुप्त नगर थाना में केस दर्ज कराया गया है।
'रामायण' का ऑनलाइन रीटेक!
वहीं दूसरा मामला और भी चौंकाने वाला है। यह खगड़िया के चौथम अंचल कार्यालय से जुड़ा है, जहां दो अलग-अलग आवेदनों में से एक में भगवान श्रीराम और दूसरे में माता सीता के नाम से निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया। आवेदन में आवेदक का नाम- श्री राम राम, पिता - दशरथ, माता - कौशल्या, गांव- अयोध्या और थाना- चौथम लिखा गया है। वहीं, दूसरे आवेदन में नाम- श्रीमती माता सीता, पिता- राजा जनक, माता- रानी सुनैना और पता भी वही। दोनों फॉर्म में मोबाइल नंबर के स्थान पर 9999999999 अंकित किया गया है और निवास प्रमाण पत्र बनवाने का उद्देश्य कुछ इस तरह लिखा गया है कि, “दुनिया खतरे में है” और “दुनिया में फिर से रामायण होगा।” चौथम अंचलाधिकारी रवि राज ने इन दोनों आवेदनों को अस्वीकार कर दिया और मामले को चौथम थाना में सौंपते हुए अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया।
प्रशासन सख्त, पुलिस ने दर्ज किए केस
दोनों मामलों को लेकर संबंधित अंचल अधिकारियों ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। आरोप है कि सरकारी प्रणाली की प्रक्रिया को बदनाम करने की नीयत से ऐसे आवेदन किए गए हैं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह सिर्फ एक शरारत है या किसी बड़े साइबर मॉकिंग की साजिश।
यह पहली बार नहीं
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही 'डॉग बाबू' नामक आवेदन से ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ था, जिसने पूरे बिहार में सरकारी पोर्टल की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब जब ‘कौआ’, ‘राम’ और ‘सीता’ जैसे नामों से फॉर्म भरे जा रहे हैं, तो सिस्टम की पारदर्शिता और ऑटो-मॉडरेशन पर सवाल उठना लाज़मी है।
क्या कहता है यह पूरा मामला ?
इन घटनाओं ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक के सहारे व्यवस्था को डिजिटल बनाना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है मानव जांच और निगरानी प्रणाली का मजबूत होना। वरना ये ऑनलाइन मंच मज़ाक का अड्डा बन जाएंगे।