हमेशा मुफ्त नहीं रहेगा UPI..!
RBI गवर्नर ने किया ऐसा खुलासा की उड़ गए सबके होश..!
25 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
क्या भारत में डिजिटल लेनदेन की सबसे लोकप्रिय प्रणाली यूपीआई (UPI) हमेशा के लिए मुफ्त बनी रह पाएगी ? इस सवाल पर अब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य में यूपीआई पर चार्ज लग सकता है। बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यूपीआई सिस्टम को चलाने की लागत है और उसे किसी न किसी को वहन करना ही पड़ेगा।
मुफ्त सेवा की स्थिरता पर सवाल
आरबीआई गवर्नर ने साफ कहा, "मैंने कभी नहीं कहा कि यूपीआई हमेशा के लिए मुफ्त रहेगा। मैंने केवल इतना कहा था कि इसके संचालन से जुड़े खर्च हैं और किसी न किसी को इस खर्च को उठाना पड़ेगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि "यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है कि भुगतान कौन कर रहा है, बल्कि यह जरूरी है कि किसी न किसी को भुगतान करना ही होगा, ताकि इस प्रणाली को टिकाऊ बनाया जा सके।"
मीडिया रिपोर्ट्स के बीच आया बयान
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ICICI बैंक देश का पहला ऐसा बैंक बनने जा रहा है जो अपने पेमेंट एग्रीगेटर्स से यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूलने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार 1 अगस्त 2025 से बैंक दो तरह के खातों पर अलग-अलग शुल्क ले रहा है।
- एस्क्रो अकाउंट्स: ₹100 के लेनदेन पर 2 पैसे यानी 2 बेसिस प्वाइंट, अधिकतम शुल्क ₹6
- गैर-एस्क्रो अकाउंट्स: 4 बेसिस प्वाइंट, अधिकतम ₹10
हालांकि, ICICI बैंक की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि फिलहाल ग्राहकों और व्यापारियों से किसी तरह का चार्ज नहीं वसूला जा रहा है।
पहले भी जताई गई थी चिंता
गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2025 में बीएफएसआई समिट के दौरान भी गवर्नर मल्होत्रा ने कहा था कि "मुफ्त यूपीआई लंबे समय तक के लिए टिकाऊ नहीं है।" उन्होंने यूपीआई को भारत की "महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना" बताया और कहा कि सरकार इसे मुफ्त रखने के लिए सब्सिडी दे रही है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ जून 2025 में ही 18.4 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जो सालाना आधार पर 32% की वृद्धि को दर्शाता है।
सेवाओं की लागत का भुगतान जरूरी: आरबीआई
गवर्नर ने जोर देकर कहा है कि "कोई भी भुगतान प्रणाली चाहे वह यूपीआई हो या अन्य तबतक टिकाऊ नहीं हो सकती जब तक उसकी लागत कोई वहन न करे। चाहे वह सरकार हो या कोई अन्य पक्ष।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में यूपीआई पूरी तरह से सरकारी सब्सिडी पर आधारित है, और बैंकों को प्रत्यक्ष खर्च नहीं उठाना पड़ रहा है।