पहलगाम हमले की साजिश का मास्टर माइंड कौन !
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा !
27 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
28 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के डाचीगाम-हरवन के घने जंगलों में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन महादेव' में मारे गए तीनों आतंकवादी पाकिस्तानी निकले। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि ये आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर ऑपरेटिव थे, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शामिल थे। ये आतंकी तभी से डाचीगाम के जंगलों में छिपे थे और इनकी पहचान कोई स्थानीय नहीं कर सका क्योंकि इस पूरे हमले में एक भी कश्मीरी शामिल नहीं था।
साजिश का मास्टर माइंड कौन ?
सुलेमान शाह उर्फ फैज़ल जट्ट इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड था। वह लश्कर का A++ ग्रेड कमांडर था और हमले का मुख्य शूटर भी वही था। उसके साथ अबू हमजा उर्फ ‘अफगान’ और यासिर उर्फ ‘जिब्रान’ भी मारे गए। हमजा ने दूसरे नंबर पर गोलीबारी की और यासिर रियर कवर संभाले हुए था। आतंकियों के पास से पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी वोटर ID स्लिप्स और NADRA से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी भी मिली, जिससे उनकी नागरिकता और पहचान की पुष्टि हुई। एक वोटर स्लिप लाहौर निर्वाचन क्षेत्र NA-125 से जुड़ी थी और दूसरी गुजरांवाला के NA-79 से।
सेटेलाईट फ़ोन से मिला संवेदनशील डाटा
सैटेलाइट फोन से मिले डेटा में NADRA के रिकॉर्ड्स के साथ-साथ उनकी उंगलियों के निशान, चेहरा पहचानने की प्रोफाइल और पारिवारिक रिश्तों की पूरी जानकारी थी। उनके पास से कराची की कंपनियों द्वारा बनाई गई चॉकलेट ‘कैंडीलैंड’ और ‘चोकोमैक्स’ के रैपर भी मिले, जिनके बैच नंबर मई 2024 में मुजफ्फराबाद (PoK) भेजी गई खेप से मेल खाते हैं। यह भी सामने आया कि तीनों आतंकी मई 2022 में LoC पार कर Gurez सेक्टर से भारत में दाखिल हुए थे। 21 अप्रैल 2025 को ये बैसारन वैली के पास एक मौसमी झोपड़ी में रुके, जहां दो कश्मीरी स्थानीय – परवेज और बशीर अहमद जोथर – ने उन्हें एक रात खाना और पनाह दी। अगले दिन सुबह ये पहलगाम की ओर बढ़े और दिन में गोलीबारी कर 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर डाचीगाम की ओर भाग निकले। ऑपरेशन महादेव में बरामद GPS डिवाइस में वही लोकेशन पाई गई, जहां से फायरिंग हुई थी और AK-103 राइफल्स से मिले कारतूसों के फोरेंसिक निशान भी घटनास्थल से मिले खोलों से 100 प्रतिशत मेल खा गए।
ब्लड सैंपल से हाब खुलासा
डाचीगाम में मिले तीनों शवों में से एक के torn शर्ट से निकाले गए रक्त से जो mitochondrial DNA प्रोफाइल बना, वो भी घटनास्थल पर मिले खून से मेल खाता है। यही नहीं, आतंकियों द्वारा उपयोग किए गए सैटेलाइट डिवाइस की इनमारसैट-4 F1 सैटेलाइट से लगातार पिंगिंग भी हुई, जिससे उनकी छुपने की जगह की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट में लश्कर के दक्षिण कश्मीर ऑपरेशंस चीफ साजिद सैफुल्लाह जट्ट को इन आतंकियों का हैंडलर बताया गया है। उसका वॉयस सैम्पल डाचीगाम से मिले सैटेलाइट फोन से मेल खा गया। इसके अलावा रावलाकोट में लश्कर के क्षेत्रीय चीफ रिज़वान अनीस ने 29 जुलाई को इन आतंकियों के घर जाकर “ग़ायबाना नमाज़” (बिना शव के जनाज़ा) आयोजित किया, जिसका वीडियो अब भारतीय डोज़ियर का हिस्सा है।
पहलगाम हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जो स्केच जारी किए थे, वे अब गलत साबित हुए हैं। एनआईए ने स्पष्ट किया कि वे स्केच दिसंबर 2024 की एक असंबंधित मुठभेड़ के एक फोन से मिली तस्वीर पर आधारित थे और वास्तविक हमलावर वही तीन पाकिस्तानी थे, जो अब मारे जा चुके हैं।