अब बिक जाएगा Google Chrome..!
Perplexity AI ने दे डाला इतना बड़ा ऑफर…
18 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Perplexity AI ने Google के लोकप्रिय वेब ब्राउज़र Chrome को खरीदने के लिए $34.5 बिलियन का ऑफर दिया है। बताया जा रहा है कि, यह प्रस्ताव एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ के जरिए किया गया है, जिसकी कॉपी AFP ने देखी है। माना जा रहा है कि अमेरिका में चल रही एंटीट्रस्ट कार्यवाही के तहत Google को Chrome बेचने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
वैल्यूएशन का लगभग दोगुना ऑफर
दिलचस्प बात यह है कि Perplexity का यह ऑफर कंपनी के हालिया फंडिंग राउंड में अनुमानित $18 बिलियन वैल्यूएशन का लगभग दोगुना है। Perplexity के CEO अरविंद श्रीनिवास ने कहा, “यह प्रस्ताव सर्वोच्च सार्वजनिक हित में एंटीट्रस्ट समाधान को पूरा करने के लिए है, जिससे Chrome एक सक्षम, स्वतंत्र ऑपरेटर के पास जाएगा, जो निरंतरता, पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा पर केंद्रित होगा।”
Google पर दबाव और अदालत का फैसला
अमेरिकी जिला न्यायालय के जज अमित मेहता जल्द ही यह तय करेंगे कि Google पर क्या ‘उपाय’ लागू किए जाएं। पिछले साल आए एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने माना था कि Google ने ऑनलाइन सर्च में अवैध एकाधिकार कायम किया हुआ है। सरकारी वकीलों का तर्क है कि AI तकनीक Google के प्रभुत्व को और बढ़ा सकती है, इसलिए Chrome को अलग किया जाना चाहिए। Google इस कदम का विरोध कर रहा है और मेहता से Chrome के डिवेस्टमेंट (विक्रय) को खारिज करने की अपील की है। जज का फैसला इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है।
विश्लेषकों और विशेषज्ञों की राय
Baird Equity Research का मानना है कि Perplexity का ऑफर Chrome की वास्तविक वैल्यू से काफी कम है और इसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। उनका अनुमान है कि चूंकि Perplexity के पास पहले से ही Chrome का प्रतिद्वंद्वी ब्राउज़र मौजूद है, यह ऑफर या तो अन्य खरीदारों को बोली लगाने के लिए प्रेरित करने या फिर अदालत के फैसले को प्रभावित करने का प्रयास हो सकता है।
बिक्री पर छिड़ी बहस
Cato Institute की टेक्नोलॉजी पॉलिसी विशेषज्ञ जेनिफर हडलस्टन का कहना है कि Chrome की बिक्री या डिफॉल्ट एग्रीमेंट पर रोक से प्रतिस्पर्धा नहीं बढ़ेगी, बल्कि नवाचार पर अंकुश लगेगा और छोटे खिलाड़ियों को नुकसान होगा। वहीं Google के वकील जॉन श्मिड्टलाइन ने अदालत में तर्क दिया कि Chrome के 80% से अधिक उपयोगकर्ता अमेरिका के बाहर हैं, इसलिए इसकी बिक्री के वैश्विक असर होंगे और इससे Chrome कमजोर हो जाएगा।
AI के युग में ब्राउज़र की दौड़
Chrome को अलग करने या कमजोर होने की संभावना ऐसे समय पर सामने आई है, जब Microsoft, ChatGPT और Perplexity जैसे प्रतिद्वंद्वी जनरेटिव AI का इस्तेमाल इंटरनेट से तेज और सटीक जानकारी देने के लिए कर रहे हैं। Google भी इस क्षेत्र में बड़े निवेश के साथ AI को अपनी सर्च और अन्य ऑनलाइन सेवाओं में एकीकृत कर रहा है।