बाली में छुट्टियां मना रही थी कनाडाई महिला, कॉकटेल पीते ही चली गई आंखों की रोशनी,
डॉक्टर ने किया इलाज लेकिन....
23 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
Viral News: छुट्टियों में दोस्तों या परिवार संग ड्रिंक लेना कई लोगों के लिए सामान्य बात है, लेकिन कभी-कभी यह लापरवाही जिंदगी बदल सकती है. कनाडा की रहने वाली एशली किंग ने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा की, जो दुनियाभर के यात्रियों के लिए चेतावनी है. एशली बाली की यात्रा पर गई थीं, जहां एक हाई-एंड बार में उन्होंने वोडका कॉकटेल पी. उन्हें लगा यह बस एक आम रात होगी, लेकिन इस ड्रिंक में मौजूद जहरीले मेथनॉल ने उनकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन ली. एशली मानती हैं कि वह “खुशनसीब” हैं कि जिंदा बच गईं, क्योंकि ऐसे कई मामलों में लोगों की मौत हो जाती है.
मेथनॉल से हर साल हजारों मौतें
दुनिया भर में हर साल हजारों लोग मेथनॉल मिलाकर बनाई गई शराब पीने से मर जाते हैं या गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं. दिसंबर में फिजी के एक लग्जरी रिसॉर्ट में जहरीली शराब पीने से सात पर्यटक अस्पताल पहुंचे. इससे एक माह पहले, लाओस में छह युवा यात्रियों की मौत हुई थी. मेथनॉल रंगहीन और ज्वलनशील होता है, जिसकी गंध और स्वाद सामान्य एथनॉल जैसा होता है, लेकिन यह बेहद विषैला है. विशेषज्ञ बताते हैं कि 30 मिलीलीटर मेथनॉल इंसान की जान ले सकता है और सिर्फ 15 मिलीलीटर से स्थायी अंधापन हो सकता है. यह पेट्रोल, पेंट थिनर और एंटीफ्रीज़ जैसे औद्योगिक उत्पादों में इस्तेमाल होता है.
दो दिन में बिगड़ी हालत, आंखों पर पड़ा असर
2011 में कॉलेज शुरू करने से पहले एशली दक्षिण बाली घूमने गई थीं. वहां ड्रिंक पीने के दो दिन बाद, ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर उन्हें बोलने में कठिनाई और अजीब व्यवहार महसूस हुआ. न्यूजीलैंड में एक सुबह उठते ही उन्होंने देखा कि सब कुछ काला है. यह अंधेरा कमरे का नहीं, बल्कि उनकी आंखों का था. सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी. जांच में खून में खतरनाक स्तर का मेथनॉल मिला. डॉक्टरों को भी हैरानी थी कि वह जीवित हैं.
इलाज के बाद भी बची सिर्फ 2% दृष्टि
एशली का इलाज तुरंत शुरू हुआ. उन्हें अस्पताल में वोडका और ऑरेंज जूस पिलाया गया ताकि मेथनॉल को शरीर से बाहर निकाला जा सके. साथ ही हेमोडायलिसिस और स्टेरॉयड दिए गए. इसके बाद भी उनकी सिर्फ 2% दृष्टि बची, जिसे वह बर्फबारी या टीवी स्क्रीन जैसा बताती हैं. अब एशली एक याचिका चला रही हैं, जिससे स्कूलों और एयरपोर्ट्स पर मेथनॉल के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके. वह कहती हैं, कि यह नहीं होना चाहिए, लेकिन होता है और बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं.