बोर्ड बैठक में CM योगी ने लगा दी अधिकारियों की क्लास,
जाने इतना क्यों खफा हो गए CM
1 months ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब बिजली आपूर्ति केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह जनता के विश्वास और शासन की संवेदनशीलता का दर्पण बन चुकी है।
ट्रिपिंग और ओवरबिलिंग पर मुख्यमंत्री की दो टूक
मुख्यमंत्री ने अफसरों को साफ शब्दों में चेताया कि ट्रिपिंग, ओवरबिलिंग और अनावश्यक कटौती किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन कमियों में तत्काल सुधार किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। योगी आदित्यनाथ ने फील्ड स्तर पर शिकायतों के समाधान की गति को तेज़ करने और प्रत्येक फीडर की तकनीकी जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि ज़रूरत के मुताबिक ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाई जाए ताकि ओवरलोडिंग जैसी स्थिति न बने।
रिकॉर्ड बिजली मांग और आपूर्ति
बैठक में बताया गया कि जून 2025 में प्रदेश ने अब तक की रिकॉर्ड 31,486 मेगावाट बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान 16,930 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई। उमस और गर्मी के बावजूद शहरी क्षेत्रों में औसतन 24 घंटे, तहसील स्तर पर 21.5 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली दी गई।
सटीक बिलिंग और स्मार्ट मीटरिंग की ओर बढ़ता प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि “हर उपभोक्ता को हर महीने समय पर, स्पष्ट और सटीक बिल मिलना चाहिए।” उन्होंने ओवरबिलिंग और फॉल्स बिलिंग पर गहरी नाराजगी जताई। विभाग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी उपभोक्ताओं को सही बिल मिले ताकि जनता का विश्वास बना रहे। अब तक 31 लाख उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से जुड़ चुके हैं और इस कार्य को ब्लॉक स्तर तक ले जाया जा रहा है।
उत्पादन क्षमता और नई परियोजनाएं
मुख्यमंत्री को बताया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 11,595 मेगावाट है। घाटमपुर और मेजा जैसी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यह आंकड़ा 16,000 मेगावाट से अधिक हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी के निर्देश दिए।
कृषि क्षेत्र के लिए अलग फीडर और सौर ऊर्जा
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए कृषि फीडर के पृथक्करण और प्रधानमंत्री कुसुम योजना के माध्यम से ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की प्राथमिकता तय की है। इससे किसानों को सस्ती और स्थायी ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।
बिजली व्यवस्था शासन की प्रतिबद्धता का दर्पण
मुख्यमंत्री ने बैठक का समापन इस संदेश के साथ किया कि बिजली व्यवस्था अब केवल ट्रांसफॉर्मर और तारों तक सीमित नहीं, बल्कि यह शासन की जवाबदेही और जनसरोकार का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को यह विश्वास होना चाहिए कि उसे समयबद्ध, पारदर्शी और बिना भेदभाव के बिजली मिल रही है।