100 में से केवल 2-4 कन्याएं ही पवित्र - ये क्या बोल गए प्रेमानंद महाराज,
सोशल मीडिया पर शुरु हुआ विवाद
1 months ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
वृंदावन के विख्यात संत प्रेमानंद महाराज एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन्होंने महिलाओं की पवित्रता और रिलेशनशिप कल्चर को लेकर ऐसा कुछ कह दिया, जिसने न केवल सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया, बल्कि महिला संगठनों और समाज के एक बड़े तबके को भी नाराज कर दिया।
क्या कहा संत प्रेमानंद ने ?
एक निजी बातचीत में संत प्रेमानंद ने कहा, "आज के समय में 100 में से मुश्किल से दो-चार कन्याएं ही पवित्र होती हैं। बाकी सब बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के चक्कर में लगी हैं।"इतना ही नहीं, उन्होंने पुरुषों को भी नहीं बख्शा। कहा कि अगर कोई युवक चार लड़कियों से संबंध बना चुका है, तो वो अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं रह पाएगा। इसी तरह, यदि कोई युवती चार पुरुषों से संबंध बना चुकी है, तो उसमें एक पति को स्वीकारने की शक्ति नहीं बचती।
युवा पीढ़ी पर चिंता या सीधा हमला?
प्रेमानंद महाराज ने अपने बयान में आज के युवाओं के रिश्तों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभव रखने वाले युवा न तो सच्चे पति बन सकते हैं, न ही सच्ची बहुएं। लेकिन समाज के कई लोगों का कहना है कि यह बयान युवाओं की निजी स्वतंत्रता और महिलाओं की गरिमा पर सीधा हमला है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
बयान के वायरल होते ही ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक यूज़र ने लिखा "अगर समाज की रक्षा ऐसे विचारों से होनी है तो महिलाओं की आज़ादी का क्या होगा?" दूसरे ने कहा, "ये वही सोच है जो महिलाओं को आज भी उनके फैसलों से वंचित रखना चाहती है।"
पहले भी संतों पर लगे हैं ऐसे आरोप
संत प्रेमानंद पहले ऐसे साधु नहीं हैं जिनके बयान विवादों में रहे हों। इससे पहले अनिरुद्धाचार्य महाराज भी अपने एक महिला-विरोधी बयान को लेकर विवादों में घिरे थे। उनकी टिप्पणी के खिलाफ महिला आयोग तक ने कार्रवाई की थी और माफी मांगने तक की नौबत आई थी।
क्या यह धार्मिक शिक्षा है या वैचारिक कट्टरता?
जहां एक ओर समाज में आध्यात्मिक गुरुओं को नैतिकता का प्रतीक माना जाता है, वहीं इस तरह के बयान धार्मिक विचारों और सामाजिक सम्मान के बीच की रेखा को धुंधला कर देते हैं। प्रेमानंद महाराज के अनुयायी अब इस बयान पर मौन हैं, लेकिन बढ़ती आलोचनाएं संकेत दे रही हैं कि समय अब बदला है और महिलाओं को लेकर की गई ऐसी टिप्पणियां अब आसानी से स्वीकार नहीं की जाएंगी।