भारत की बात सुनाता हूं... सांसद मनीष तिवारी का कांग्रेस पर तंज,
ऑपरेशन सिंदूर पर बोलने से रोके जाने पर जताई नाराज़गी
1 months ago
Written By: Ashwani Tiwari
Manish Tiwari News: है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं…55 साल पुरानी फिल्म पूरब और पश्चिम का यह गीत अचानक से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस गीत की पंक्तियों को कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया है, लेकिन यह कोई आम पोस्ट नहीं थी। यह पोस्ट एक क्रिप्टिक मैसेज था, जिसमें मनीष तिवारी ने संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान बोलने का मौका न मिलने को लेकर अपनी नाराज़गी जाहिर की है। उनके इस पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर ही एक नई बहस शुरू हो गई है।
क्यों नाराज़ हैं मनीष तिवारी ?
दरअसल, मनीष तिवारी को इस बात से नाराज़गी है कि लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने एक्स पर मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अपनी नाराज़गी को इशारों में जाहिर किया। सूत्रों के अनुसार, मनीष तिवारी ने पार्टी से खुद को वक्ताओं की सूची में शामिल करने की मांग की थी, लेकिन उनका नाम लिस्ट में नहीं रखा गया। वहीं, शशि थरूर ने पार्टी से बोलने की मांग ही नहीं की।
किसे मिला बोलने का मौका ?
कांग्रेस की ओर से लोकसभा में जिन सांसदों को बोलने का मौका मिला, उनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, प्रणीति शिंदे, गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा, सप्तगिरि उलाका और बिजेंद्र ओला शामिल हैं। इन नामों में न मनीष तिवारी का नाम था और न ही शशि थरूर का।
थरूर ने क्यों नहीं की बहस में भागीदारी ?
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस चाहती थी कि शशि थरूर ऑपरेशन सिंदूर पर बहस में हिस्सा लें और सरकार से कड़े सवाल पूछें, लेकिन शर्त यह थी कि वह पार्टी लाइन के अनुसार बोलें। थरूर ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया क्योंकि उनका मानना है कि सरकार का यह कदम सफल रहा है। इस वजह से उन्होंने संसद में बोलने से मना कर दिया।
पूर्व में भेजे गए थे विदेश
मनीष तिवारी और शशि थरूर दोनों ही ऐसे सांसद हैं, जिन्हें केंद्र सरकार ने सीमापार आतंकवाद के मसले पर भारत की नीति को वैश्विक मंचों पर रखने के लिए प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर विदेश भेजा था। ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम विषय पर उन्हें संसद में बोलने का मौका न देना, खुद कांग्रेस के भीतर ही असंतोष का कारण बनता दिख रहा है।