टिकैत की चाल से बदल रहा पश्चिम का सियासी समीकरण,
ब्रजेश पाठक से मुलाकात और मायावती की तारीफ ने बढ़ाई अखिलेश की मुश्किलें
1 months ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की हालिया गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से उनकी मुलाकात और फिर सुल्तानपुर में बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती को नंबर वन मुख्यमंत्री बताने वाले बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि अब तक समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन की ओर झुके माने जाने वाले टिकैत का रुख अब बदलता नजर आ रहा है, जिससे सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को झटका लग सकता है।
टिकैत की मुलाकात और मायावती की तारीफ
29 जुलाई को लखनऊ में राकेश टिकैत ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की, जिसे शुरुआत में औपचारिक भेंट माना गया। लेकिन बाद में जब टिकैत सुल्तानपुर पहुंचे तो उन्होंने मायावती को यूपी की अब तक की सबसे बेहतर मुख्यमंत्री बताया। उन्होंने मायावती सरकार की किसान नीतियों की खुलकर सराहना की। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि टिकैत 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा-रालोद गठबंधन के पक्ष में थे और पश्चिमी यूपी में उन्होंने भाजपा विरोधी रुख अपनाया था।
पश्चिमी यूपी में टिकैत का प्रभाव
राकेश टिकैत का प्रभाव खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान समुदाय पर काफी गहरा है। 2020-21 के किसान आंदोलन ने उन्हें क्षेत्र में एक मजबूत किसान नेता बना दिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के खिलाफ प्रचार किया, जिसका असर सपा-रालोद गठबंधन की जीत के रूप में दिखा। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा को टिकैत के समर्थन का फायदा मिला, खासकर गैर-जाटव दलित और गैर-यादव पिछड़े वर्गों में।
सपा की चिंता और भाजपा की रणनीति
टिकैत के मायावती की तारीफ और ब्रजेश पाठक से मुलाकात ने सपा खेमे की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी यूपी में जाट, मुस्लिम और दलित मतदाता सपा की जीत की कुंजी रहे हैं। अब यदि टिकैत बसपा या भाजपा की ओर झुकते हैं, तो सपा की पीडीए रणनीति प्रभावित हो सकती है। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने टिकैत के बयान को उनकी व्यक्तिगत राय बताया और कहा कि सपा किसानों और दलितों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। उधर भाजपा इसे किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मान रही है। ब्रजेश पाठक, जो खुद पश्चिमी यूपी में भाजपा का ब्राह्मण चेहरा हैं, पहले भी सपा और अखिलेश यादव पर तीखे हमले कर चुके हैं। अब टिकैत से मुलाकात को भाजपा एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रही है।
2027 से पहले बदलते समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राकेश टिकैत का यह नया रुख उत्तर प्रदेश की सियासी तस्वीर को बदल सकता है। यदि बसपा और टिकैत के बीच कोई रणनीतिक तालमेल बनता है तो यह पश्चिमी यूपी में नया दलित-किसान समीकरण तैयार कर सकता है। वहीं भाजपा भी टिकैत के प्रभाव का लाभ उठाने के प्रयास में है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे चलकर राकेश टिकैत किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ते हैं और यूपी की राजनीति किस ओर करवट लेती है।