प्रमोशन के बाद प्रेमानंद महाराज से मिले संभल के सिंघम…
पुलिसिंग को लेकर पूछ दिया एक बड़ा सवाल…जवाब जानकर चौक जाएंगे आप…
20 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
संभल के चर्चित पुलिस अफसर अनुज चौधरी को हाल ही में पदोन्नति मिली है। वे डीएसपी से एएसपी बने हैं। प्रमोशन के बाद रविवार को वे वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने कानून, न्याय और नैतिक दायित्व से जुड़े जटिल प्रश्नों पर भी मार्गदर्शन प्राप्त किया।
कानून को लेकर पूछा सवाल
एएसपी अनुज चौधरी ने संत से एक संवेदनशील प्रश्न पूछा, “जब किसी केस में वादी पक्ष कहता है कि उसके बेटे की हत्या हुई है, लेकिन स्पष्ट साक्ष्य नहीं होते, और आरोपी यह दावा करता है कि वह घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था, ऐसे में पुलिस की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए? अगर पुलिस आरोपी को छोड़ देती है तो उस पर लापरवाही या पक्षपात का आरोप लगता है, और यदि साक्ष्य के अभाव में भी कार्यवाही की जाती है तो यह अनुचित प्रतीत होता है।”
समय उसे अवश्य देगा दंड
संत प्रेमानंद महाराज ने उत्तर देते हुए कहा कि जब रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है तो उसे यूं ही छोड़ना उचित नहीं है। पुलिस अंतर्यामी नहीं होती कि पर्दे के पीछे की सभी बातें जान ले। उपलब्ध साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर ही निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि आरोपी निर्दोष होते हुए भी सजा पाता है, तो यह उसके प्रारब्ध का परिणाम है, और अगर अपराधी बच निकलता है तो उसका पाप छिपा नहीं रहेगा, समय उसे अवश्य दंड देगा।”
गुप्त पाप का परिणाम
संत ने आगे समझाया कि यदि वर्तमान में व्यक्ति निष्पाप है, लेकिन उसके पूर्व के किसी पाप का प्रभाव है, तो वह फंस सकता है। वह कह सकता है कि उसने यह अपराध नहीं किया, और पुलिस भी यही कह सकती है, लेकिन उसे तब तक भोगना पड़ेगा जब तक उसका गुप्त पाप समाप्त न हो जाए। जैसे ही उसका पाप खत्म होगा, साक्ष्य सामने आएंगे और वह दोषमुक्त हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर काम करती है तो वह दोषी नहीं मानी जाएगी, लेकिन यदि किसी के कहने पर या लाभ लेकर कार्रवाई की जाती है तो वह गलत होगा।