पांच साल से इस सरकारी स्कूल में नहीं आई है बिजली,
शुरू से ही बुनियादी सुविधाओं के लिये तड़प रहे विद्यार्थी
1 months ago
Written By: State Desk
बस्ती जिले के सदर ब्लॉक के कुढ़ा पट्टी दरियांव गांव में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की हालत बदतर है। वर्ष 2020 में यह भवन बनकर तैयार हुआ और 2021 में इसमें पढ़ाई भी शुरू हो गई, मगर बिजली और पहुंच मार्ग जैसी बुनियादी सुविधाएं अब तक यहां मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं। इससे यहां पढ़ने वाली छात्राओं और शिक्षिकाओं को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली के पंखे, बल्ब तो हैं, पर करंट नहीं!
विद्यालय की इमारत में क्लासरूम में पंखे लगे हैं, बल्ब भी टंगे हैं, लेकिन आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं दिया गया। गर्मियों में छात्राएं पसीने में भीगकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पंखे देखकर भी हवा नहीं मिलती, यह विडंबना बच्चों को झेलनी पड़ रही है।
रास्ता न होने से और भी मुश्किलें
छात्राओं ने बताया कि स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। उन्हें खेतों के बीच बनी पगडंडी से होकर स्कूल आना पड़ता है, और बारिश के मौसम में तो यह रास्ता पूरी तरह गायब हो जाता है। कई बार खेत के मालिक रास्ता बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें पढ़ाई से वंचित होना पड़ता है।
शिक्षिकाएं भी परेशान
विद्यालय की एक शिक्षिका ने बताया कि रास्ता न होने के कारण उन्हें अपनी गाड़ी मुख्य मार्ग से 200 मीटर पहले ही खड़ी करनी पड़ती है और पैदल चलकर स्कूल आना होता है। स्कूल में बिजली न होने से शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
विभागों की लापरवाही उजागर
उप जिला विद्यालय निरीक्षक उमाशंकर ने बताया कि जनपद के तीन इंटर कॉलेजों में बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिनमें कुढ़ा पट्टी दरियांव गांव का यह कन्या इंटर कॉलेज भी शामिल है। उनके अनुसार बिजली विभाग को बजट भेजा जा चुका है और कई पत्राचार भी किए जा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है।
टेंडर हो गया, ठेकेदार की गलती
बिजली विभाग के मुख्य अभियंता विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि संबंधित कार्य का टेंडर हो चुका है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते अब तक काम शुरू नहीं हो सका। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि अगले 15 दिनों में स्कूलों में बिजली का काम पूरा कर लिया जाएगा।
छात्राओं की संख्या में गिरावट
सुविधाओं के अभाव के चलते स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है, जिससे सरकार की "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसी योजनाओं पर सवाल उठने लगे हैं।