गोबर बनेगा कपड़े और प्लास्टिक का विकल्प..!
यूपी में सुरु होने जा रही कमाल की योजना…
29 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश सरकार अब प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने और जैविक संसाधनों के अधिकतम उपयोग की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल करने जा रही है। इस नई योजना के तहत प्रदेश में निराश्रित गऊ माताओं से प्राप्त गोबर का उपयोग बायोप्लास्टिक, जैव-पॉलिमर, इको-पेपर, जैविक वस्त्र और बायोगैस जैसे पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा। योजना का उद्देश्य न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा करना है, बल्कि गांवों को ऊर्जा, रोजगार और उद्यम के नए अवसर भी देना है।
हर दिन 54 लाख किलो गोबर से बनेगा नवाचार
प्रदेश के गो सेवा आयोग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन करीब 54 लाख किलोग्राम गोबर निराश्रित गोवंश से प्राप्त होता है। यही गोबर अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बनने जा रहा है। वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए इससे प्लास्टिक के विकल्प तैयार किए जाएंगे, जिससे न केवल प्रदूषण को रोका जा सकेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी नया बल मिलेगा।
“हर गांव ऊर्जा केंद्र” मॉडल से जुड़ेगी योजना
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “हर गांव ऊर्जा केंद्र” मॉडल पर आधारित है। इसका मकसद है कि गोबर आधारित बायोगैस से न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जाए, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक खेती को भी बढ़ावा मिले। इसके अलावा, गोशालाओं की आत्मनिर्भरता और ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना भी योजना का प्रमुख लक्ष्य है।
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ने विकसित की तकनीक
इस योजना की तकनीकी सलाहकार डॉ. शुचि वर्मा हैं, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में बायोटेक्नोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने गोबर से बायोप्लास्टिक निर्माण की प्रभावशाली तकनीक विकसित की है। गो सेवा आयोग में उन्होंने अपने शोध के निष्कर्षों को प्रस्तुत भी किया, जिसे अधिकारियों ने सराहा और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकेगा यूपी का मॉडल
गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि यह मॉडल जल्द ही अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त करेगा। पर्यावरण और सतत विकास के वैश्विक लक्ष्य में यह पहल एक मजबूत उदाहरण बन सकती है। गोबर से उत्पाद बनने की इस प्रक्रिया को बड़े स्तर पर अपनाया गया तो भारत की छवि एक हरित राष्ट्र के रूप में और अधिक सशक्त होगी।
रोजगार, उद्यम और सरकार को राजस्व
सरकार का मानना है कि इस योजना के जरिए लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा और महिलाओं को लघु उद्यम की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही इससे सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति होगी। गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की नींव रखेगा।