भीषण बाढ़ के बावजूद नहीं बुझी ये अखंड ज्योति…
महज संयोग या चमत्कार..!
24 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
प्रयागराज इन दिनों विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है। गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। घाट, मंदिर, आश्रम और पूरा मेला क्षेत्र पानी में डूबा हुआ है। लेकिन इसी भयावह आपदा के बीच झूंसी पुल के नीचे स्थित एक मचाननुमा आश्रम से आस्था की अद्भुत लौ जल रही है। देवरहा बाबा के शिष्य रामदास महाराज की जलती हुई अखंड ज्योति।
झूंसी पुल के नीचे मचान पर जलती है ज्योति
झूंसी पुल के नीचे बना यह स्थायी मचान संगम क्षेत्र का अनोखा स्थल है। लगभग 10 फीट ऊंचे चबूतरे पर बने इस पंडाल में 80 फीट ऊंचा लोहे का खंभा है, जिसकी चोटी पर शीशे से ढका हुआ एक छोटा सा मंच है, जहां यह अखंड ज्योति वर्षों से प्रज्वलित है। बाढ़ के चलते मचान का एक हिस्सा ढह गया, लेकिन खंभे पर स्थित ज्योति प्रभावित नहीं हुई। नावों के सहारे वहां पहुंचकर अभी भी उसकी सेवा की जा रही है।
सेवा में समर्पित 'मचान वाले बाबा'
रामदास महाराज, जिन्हें श्रद्धालु 'मचान वाले बाबा' के नाम से जानते हैं, पिछले दो दशकों से इस अखंड ज्योति की सेवा में लगे हैं। वे देसी घी से इसे जलाते हैं और कई-कई दिनों तक नीचे नहीं उतरते। उनका मानना है कि यह ज्योति देश, धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जल रही है। इसलिए चाहे बाढ़ हो या कोई अन्य आपदा, इसे कभी बुझने नहीं देना चाहिए।
श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र
रामदास महाराज का यह मचाननुमा आश्रम विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ खींचता है। दूर-दराज से लोग अखंड ज्योति के दर्शन करने आते हैं। बाढ़, बारिश और धूप हर मौसम को झेल सकने वाली इस रचना की देखभाल स्वयं बाबा और उनके शिष्य करते हैं। यह ज्योति बिना किसी सरकारी मदद या संस्था की सहायता के लगातार जल रही है।
बाढ़ में आस्था का संदेश
जब पूरी संगमनगरी जलमग्न है और लोग संकट में हैं, ऐसे समय में यह ज्योति एक चमत्कार की तरह दिखाई दे रही है। यह बता रही है कि सच्ची सेवा, अडिग संकल्प और अटूट आस्था किसी भी आपदा को मात दे सकती है। झूंसी पुल के नीचे यह अखंड लौ न सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि लोगों के लिए आशा की वह किरण है जो अंधकार में भी जलती रहती है।