भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे IAS अभिषेक प्रकाश की बढ़ी मुश्किलें..!
ED की छापेमारी से मचा हडकंप…
24 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक सेवा में कभी बेहद प्रभावशाली माने जाने वाले आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश इन दिनों लगातार मुश्किलों में घिरते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में पहले ही निलंबित किए जा चुके अभिषेक प्रकाश के खिलाफ अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सक्रियता ने मामला और गंभीर बना दिया है। हाल ही में उनके करीबी निकांत जैन के ठिकानों पर हुई ईडी की छापेमारी के बाद माना जा रहा है कि आईएएस अधिकारी की मुश्किलें आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं।
अभिषेक प्रकाश का प्रशासनिक सफर
अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इनका जन्म 21 दिसंबर 1982 को बिहार में हुआ था। इंजीनियरिंग (B.Tech) की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में कदम रखा। अपने करियर के दौरान उन्होंने लखीमपुर खीरी, बरेली, अलीगढ़, हमीरपुर और राजधानी लखनऊ जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में कार्य किया। लखनऊ में वे 31 अक्टूबर 2019 से 7 जून 2022 तक डीएम रहे। इसके साथ ही वे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष और यूपी इन्वेस्ट के सीईओ के पद पर भी रहे।
सौर ऊर्जा परियोजनाओं में कमीशनखोरी का आरोप
मार्च 2025 में अभिषेक प्रकाश को सौर ऊर्जा परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया। शिकायतकर्ता एक उद्योगपति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताया कि निकांत जैन, जो अभिषेक का करीबी माना जाता है, उनके नाम पर कमीशन मांग रहा था। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एसटीएफ को सौंप दी। जांच में आरोपों की पुष्टि हुई और निकांत जैन को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद सरकार ने अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया।
डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण घोटाले में भी नाम
सौर ऊर्जा घोटाले के अलावा अभिषेक प्रकाश का नाम डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण घोटाले में भी सामने आया। लखनऊ की सरोजनीनगर तहसील के भटगांव गांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ। आरोप हैं कि भू-माफियाओं ने अधिकारियों से मिलीभगत कर किसानों से सस्ती दरों पर ज़मीन खरीदी और बाद में उसी ज़मीन पर भारी सरकारी मुआवजा ले लिया गया। राजस्व परिषद की जांच में पता चला कि अधिकारियों ने अपने नौकरों और रिश्तेदारों के नाम पर भी ज़मीनें ली थीं। कुल 45.18 करोड़ के मुआवजे में से करीब 20 करोड़ की गड़बड़ी उजागर हुई।
जांच रिपोर्ट में 18 अधिकारी दोषी, कई सस्पेंड
राजस्व परिषद की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश, एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार सहित कुल 18 अधिकारियों को दोषी पाया गया है। अब तक चार कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवंटियों के नाम जोड़े गए थे और संक्रमणीय भूमि को नियमों के विरुद्ध बेच दिया गया। बाहरी लोगों को ज़मीन का मालिक बताकर मुआवजा भी दिलवाया गया।
सरकार का कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगी। आईएएस जैसे उच्च स्तर के अधिकारियों के खिलाफ की गई सीधी कार्रवाई सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का स्पष्ट संकेत है।