बलरामपुर में रक्तश्राव से तड़पती रही बालिका,
धन कमाने के लिए समझौता कराते रहे थाना और हल्का इंचार्ज
1 months ago
Written By: विनय के. सिंह
लखनऊ: बलरामपुर में निलंबित हो चुके पचपेड़वा थाना इंचार्ज सत्येंद्र बहादुर सिंह एवं हल्का इंचार्ज बदरुद्दीन खान ने धन कमाने के लिए वर्दी को छोड़िए इंसानियत को भी ताख पर रख दिया। सात वर्षीय बालिका का योन शोषण होने के बाद उसके शरीर से रक्तश्राव होता रहा, लेकिन दोनों अधिकारी धन कमाने के लिए समझौता कराने में लगे रहे। सीओ की जांच में दोषी पाए जाने पर एसपी ने दोनों को निलंबित कर दिया है, लेकिन अभी तक दोनों के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज कराया।
मोटा धन कामने के लालच में चौकी इंचार्ज को सौंपा मामला
क्षेत्राधिकारी द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक 14 जुलाई 2025 को सोहना बरगदहा पचपेड़वा निवासी सात वर्षीय बालिका अचानक बारिश आने के कारण गांव के पास ही एक छप्पर के नीचे छिप गई थी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक गांव के ही सादान पुत्र अब्दुल मजीद द्वारा लगभग शाम छह बजे पीड़िता का योन शोषण किया, जिससे उसके गुप्तांग में रक्तश्राव शुरु हो गया। पिता उसी रात 11 बजे थाने पहुंचे और थानेदार सत्येंद्र बहादुर सिंह को पूरी आपबीती सुनाई। सत्येंद्र बदाहुर सिंह को तत्काल बालिका का मेडिकल और एफआईआर दर्ज कराना चाहिए था, लेकिन उन्होंने मोटा धन कमाने की लालसा में यह मामला हल्का इंचार्ज बदरुद्दीन खान को सौंप दिया। सूत्रों के मुताबिक अब बदरुद्दीन खान ने आरोपी सादान के पिता अब्दुल मजीद से मोटी रकम वसूली और बालिका के पिता को जबरदस्ती चुप करा दिया। सूचना जब कप्तान के पास पहुंची तो उन्होंने क्षेत्राधिकारी से मामले की जांच कराई, तब मामला उजागर हुआ।
मानवाधिकार आयोग से हो चुका है कार्रवाई का आदेश, दोनों कप्तानों ने नहीं की कार्रवाई
निलंबित एसएचओ सतेंद्र बहादुर सिंह ने बलरामपुर में ही नहीं बल्कि बहराइच में तैनाती के दौरान भी वर्दी को तार-तार कर रखा है। इनके खिलाफ मानवाधिकार आयोग ने भी कार्रवाई का आदेश दे रखा था, लेकिन बहराइच एसपी ने कोई कार्रवाई नहीं की। उधर बलरामपुर में तबादले के दौरान सारे आदेशों को दरकिनार कर बलरामपुर एसपी ने पचपेड़वा थाने का एसएचओ बना दिया। 16 जुलाई 2024 को शासन ने सतेंद्र बहादुर सिंह के खिलाफ जांच करने का आदेश दिया था। अपर पुलिस अधीक्षक रामानांद कुशवाहा ने मामले की जांच की थी। आरोप था कि थाना देहात कोतवाली में तैनाती के दौरान बहराइच की रहने वाली श्वेता पाठक उर्फ सुषमा पाठक पत्नी रामप्रकाश के साथ इतनी जबरदस्ती की कि उन्हें मानवाधिकार आयोग में शरण लेनी पड़ी। आयोग ने इनके प्रकरण की सुनवाई के दौरान शासन को जांच कराने का आदेश दिया था। इस प्रकरण पर अपराध निरीक्षक संतोष कुमार यादव, उपनिरीक्षक भगवान यादव व तत्कालीन महिला थाना प्रभारी शीला यादव के विरुद्ध भी जांच हुई थी। उक्त सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए थे।