बलिया वाले साहब बोले यादव - मुस्लिम का कब्ज़ा हटवाओ...
CM योगी ने लिया बड़ा एक्शन…DPRO निलंबित…
26 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शासन-प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। जहां एक तरफ योगी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' की नीति पर चलने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके ही एक वरिष्ठ अधिकारी के तुगलकी आदेश ने सरकार की छवि को दागदार कर दिया है। जिसके बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने DPRO को निलंबित कर दिया है।
विशेष जाती का कब्ज़ा हटाने के आदेश
दरअसल यह मामला बलिया के जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) अवनीश कुमार से जुड़ा है, जिन्होंने एक ऐसा निर्देश जारी किया, जिसने पूरे प्रदेश में विवाद खड़ा कर दिया। इस आदेश में यादव समाज और मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ विशेष रूप से अवैध कब्जा हटाने की बात कही गई थी।
धर्म और जाति के नाम पर प्रशासनिक कार्रवाई
डीपीआरओ अवनीश कुमार द्वारा जारी किए गए इस आदेश में ज़िले के समस्त खंड विकास अधिकारियों (BDO) को निर्देश दिया गया था कि वे ग्राम समाज की भूमि, खलिहान, खेल मैदान, श्मशान भूमि, पंचायत भवन जैसी जगहों से यादव और मुस्लिम समुदाय द्वारा किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाएं। इतना ही नहीं, इस जातिविशेष के खिलाफ़ प्रशासनिक कार्रवाई का पत्र जिले के सभी उपजिलाधिकारियों (SDM), कमिश्नर, मुख्य विकास अधिकारी (CDO), और जिलाधिकारी (DM) को भी भेजा गया था।
आदेश वायरल होते ही मचा बवाल
वहीं जैसे ही यह पत्र सार्वजनिक हुआ, पूरे प्रदेश में बवाल मच गया। सोशल मीडिया पर दो पत्र वायरल हुए, एक पंचायती राज विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को, और दूसरा बलिया के डीपीआरओ द्वारा खंड विकास अधिकारियों को। इन पत्रों में साफ तौर पर यादव और मुस्लिमों के नाम लेते हुए उन्हें अवैध कब्जे का दोषी ठहराया गया था, जिसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
सीएम योगी ने दिखाई ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति
मामले के तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल एक्शन लेते हुए डीपीआरओ का विवादित आदेश रद्द करने के निर्देश दिए। साथ ही पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक को निलंबित कर दिया गया। सीएम योगी ने साफ कहा कि सरकार की कोई भी नीति या कार्रवाई जाति या धर्म के आधार पर नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान तो चलेंगे, लेकिन वे किसी धर्म या जाति को निशाना बनाकर नहीं होंगे।
क्या कहता है संविधान और शासन का नियम?
मुख्यमंत्री का रुख साफ था, किसी भी सरकारी कार्रवाई में जातीय या धार्मिक पूर्वाग्रह की कोई जगह नहीं हो सकती। संविधान में समानता का अधिकार सर्वोपरि है और प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसी मूल भावना के साथ काम करना चाहिए।