दो सगे भाई, दो मजहब और एक खौफनाक अंजाम...
सीतापुर में STF एनकाउंटर में ढेर हुए पत्रकार हत्याकांड के मोस्ट वांटेड शूटर...
24 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
सीतापुर के पिसावां इलाके में गुरुवार को एक ऐसी कहानी का खूनी पड़ाव खत्म हुआ, जो मजहब, पहचान और क्रूरता के हर दायरे को लांघ चुकी थी। दो सगे भाई, एक का नाम राजू तिवारी, दूसरा संजय तिवारी। लेकिन असल में दोनों रिजवान खान और अकील खान के नाम से अलग-अलग पहचान रखते थे। माँ हिंदू थी, पिता मुसलमान और दोनों की ज़िंदगी का रास्ता जुड़ा था अपराध और सुपारी किलिंग से। जीहाँ यहां यूपी stf ने बहुचर्चित पत्रकार हत्याकांड के आरोपी और एक लाख के इनामिया दो सगे भाइयों को मुठभेड़ में मार गिराया है।
एक लाख का था इनाम
मिली जानकारी के मुताबिक गत 8 मार्च को पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की इन्हीं दोनों भाइयों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। अब यूपी एसटीएफ ने गुरुवार सुबह इन दोनों कुख्यात शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया है। ये वही दो नाम थे जिनपर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था और जिनकी तलाश पूरे प्रदेश में चल रही थी।
चेकिंग के दौरान हुआ एनकाउंटर
जानकारी के मुताबिक पुलिस और STF की टीम को शूटरों की मूवमेंट की खबर पहले से थी। सुबह-सुबह पिसावां इलाके में नाकेबंदी चल रही थी। तभी बाइक पर सवार होकर आए दो युवक रुकने के बजाय पुलिस पर ही फायरिंग करने लगे। जवाबी कार्रवाई में दोनों गोली लगने से घायल हो गए। जिला अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एक का नाम तिवारी, एक का खान, मजहब के फेर में जन्मी दोहरी पहचान
मृतकों की पहचान मिश्रिख थाना क्षेत्र के अटवा गांव निवासी राजू तिवारी उर्फ रिजवान खान और संजय तिवारी उर्फ अकील खान के रूप में हुई। दोनों सगे भाई थे। मां हिंदू थी, लेकिन पिता मुसलमान, जिससे इनकी पहचान दो नामों में बंटी रही, कभी हिंदू ब्राह्मण की तरह "तिवारी", तो कभी शातिर अपराधियों की दुनिया में "खान" बनकर।
पत्रकार की हत्या ने हिला दिया था उत्तर प्रदेश
दरसल गत 8 मार्च 2025 को राघवेंद्र बाजपेयी को तब मौत के घाट उतार दिया गया जब वह लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर अपनी बाइक से जा रहे थे। हेमपुर क्रॉसिंग के ओवरब्रिज पर बाइक सवार शूटरों ने ताबड़तोड़ गोलियां दागीं, जिनमे से तीन गोलियां सीधे उनके कंधे और सीने में लगीं। राघवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं भीड़ ने जब विरोध जताया तो पुलिस और स्थानीय लोगों में टकराव भी हुआ।
मंदिर, पुजारी और वो गंदी तस्वीर
जानकारी के मुताबिक इस पूरी हत्या की साजिश रची गई थी महोली के प्रसिद्ध कारेदेव बाबा मंदिर के भीतर। मुख्य पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर ने अपनी करतूत छुपाने के लिए राघवेंद्र को मरवा दिया। वजह? पत्रकार ने पुजारी को मंदिर परिसर में आपत्तिजनक हालत में देख लिया था और फोटो भी खींच ली थी। लेकिन पुजारी को डर था कि यह बात बाहर आई तो उसका पर्दाफाश हो जाएगा। पत्रकार से दोस्ती थी, लेकिन अब वो एक ख़तरा बन चुका था। इसी डर ने उस पुजारी को हत्यारा बना दिया।
4 लाख की सुपारी, 33 दिन की तफ्तीश और फिर परत-दर-परत खुलासा
पुलिस ने हत्या के बाद धान खरीद घोटाले की ओर जांच शुरू की, लेकिन असली सच धीरे-धीरे सामने आया। चार हजार से ज़्यादा मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए, सैकड़ों लोगों से पूछताछ हुई। CCTV फुटेज से लेकर स्केच तक तैयार हुए। और फिर शिवानंद बाबा, उसके साथी असलम गाजी और निर्मल सिंह पकड़े गए। पूछताछ में बाबा ने कबूला कि, पत्रकार से ब्लैकमेलिंग के डर में आकर उसने दोनों शूटरों को 4 लाख की सुपारी दी थी।
अब जबकि दोनों शूटर मारे जा चुके हैं, क्या यह अंत है?
पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या ने प्रदेश भर में झकझोर कर रख दिया था। अब जब हत्या की सुपारी लेने वाले दोनों मुख्य शूटर ढेर हो चुके हैं, सवाल यह उठता है—क्या इंसाफ अब मुकम्मल हो गया? या यह केवल उस लकीर की एक कड़ी है, जिसके आगे और भी चेहरे छिपे हो सकते हैं ? कहानी अभी खत्म नहीं हुई, लेकिन इतना तय है—जिस मंदिर में ईश्वर का नाम लिया जाना था, वहां साजिशें पलीं। और जिन नामों पर धर्म की पहचान होती है, उन्होंने ही मजहब और मानवता दोनों का खून कर दिया।