क्या हुआ जब लखनऊ के IIT-N ने शुरू कर दिया सॉफ्ट पोर्न वाला उल्लू APP !
जानें कौन हैं फाउंडर और कैसे की करोड़ो की कमाई…
1 months ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
लखनऊ: केंद्र सरकार ने हाल ही में देशभर में लोकप्रिय रहे कुछ भारतीय ऐप्स पर बैन लगा दिया है, जिनमें उल्लू, एएलटी बालाजी, देसीफ्लिक्स और बिगशॉट्स जैसे ऐप्स शामिल हैं। इन सभी पर आईटी एक्ट 2000 और अन्य कानूनों के उल्लंघन का आरोप है। सरकार के अनुसार, ये ऐप्स सॉफ्ट पॉर्न या बोल्ड कंटेंट प्रसारित कर रहे थे, जो डिजिटल नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारियों के दायरे से बाहर हैं। लेकिन इन सबके बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, उल्लू ऐप के फाउंडर विभु अग्रवाल, जो लखनऊ के रहने वाले हैं और जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कारोबारी सफर काफी प्रभावशाली रहा है।
आईआईटी से पीएचडी तक: उच्च शिक्षा का शानदार सफर
विभु अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर से बीटेक, जापान से एमबीए और अमेरिका से पीएचडी की है। तकनीक और प्रबंधन की बेहतरीन समझ ने उन्हें अलग-अलग इंडस्ट्री में पहचान दिलाई। उन्होंने 1995 में महज 30 साल की उम्र में 'जेपीको इंडिया' के नाम से अपना पहला व्यवसाय शुरू किया जो स्टील प्रोडक्शन से जुड़ा था। यह कंपनी टीएमटी बार बनाती थी और धीरे-धीरे उत्तर भारत में अपना स्थान मजबूत करने में कामयाब रही।
टेक्नोलॉजी से मीडिया की दुनिया तक का सफर
स्टील कारोबार में सफलता के बाद विभु ने टेक इंडस्ट्री की ओर रुख किया और इसके बाद कदम रखा मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में। साल 2018 में उन्होंने 'उल्लू ऐप' लॉन्च किया, जो बोल्ड और वयस्कों के लिए कंटेंट प्रसारित करता था। यह ऐप कुछ ही समय में बेहद लोकप्रिय हो गया और इसके 5 करोड़ से अधिक एक्टिव यूज़र्स बन गए। उल्लू ऐप का सब्सक्रिप्शन 10 दिन से लेकर एक साल तक के अलग-अलग प्लान्स में उपलब्ध था। FY2024 में इस ऐप ने 100 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 15.14 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया।
विवादों में उलझा 'उल्लू ऐप'
हालांकि लोकप्रियता के साथ ही विवाद भी इस ऐप से जुड़ते चले गए। बाल अधिकार आयोग ने इसके कंटेंट की कड़ी आलोचना की थी। उनके अनुसार, यह ऐप किशोरों और युवाओं को गलत दिशा में प्रभावित कर सकता है। सरकार द्वारा लगाए गए बैन के बाद उल्लू ऐप का भविष्य अधर में नजर आता है।
'अतरंगी' और 'हरी ओम' ऐप की भी शुरुआत
उल्लू की सफलता के बाद विभु ने 'अतरंगी ऐप' लॉन्च किया, जो भी अच्छी खासी सफलता बटोरने में कामयाब रहा। इसके अलावा उन्होंने 'हरी ओम ऐप' भी पेश किया, जिसमें माइथोलॉजिकल कंटेंट को प्रमोट किया गया। विभु अग्रवाल 'श्री जयप्रकाश चैरिटेबल ट्रस्ट' के जरिए सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हैं।