क्या हुआ जब यूपी में आपस में ही भिड़ गए परिवहन विभाग के दो डिपो..!
मेरठ डिपो के बस अड्डों पर नोएडा डिपो की बसों के घुसने पर लगा बैन..!
24 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के दो बड़े और व्यस्ततम बस डिपो नोएडा और मेरठ अब आपस में ही टकराव की स्थिति में आ गए हैं। रोज़ हजारों यात्रियों को एक जिले से दूसरे जिले तक ले जाने वाली बसों के बीच अब सियासी या प्रशासनिक नहीं, बल्कि विभागीय रार छिड़ गई है।
मेरठ में नोएडा की बसों को रोकने का आरोप
नोएडा डिपो के क्षेत्रीय सेवा प्रबंधक (एआरएम) रोहताश कुमार ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि मेरठ डिपो प्रशासन ने उनकी बसों को मेरठ बस अड्डे में घुसने से रोक दिया है। औद्योगिक नगरी नोएडा से प्रतिदिन लगभग 40 बसें मेरठ भेजी जाती हैं, लेकिन अब इन्हें मेरठ बस स्टैंड के बाहर ही रोक दिया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।
यात्री परेशान, रोडवेज को राजस्व का नुकसान
बसों को बस अड्डे में न घुसने देने की वजह से नोएडा से मेरठ आने वाले यात्रियों को बस से उतरने के लिए सड़क पर ही मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए असुविधाजनक है, बल्कि रोडवेज को भी भारी राजस्व हानि पहुंचा रही है। डिपो के अधिकारियों की आपसी तकरार का खामियाजा आम जनता और विभाग दोनों को भुगतना पड़ रहा है।
नोएडा ARM ने मेरठ ARM पर लगाए गंभीर आरोप
नोएडा डिपो के एआरएम रोहताश कुमार ने मेरठ डिपो के एआरएम विपिन अग्रवाल पर पक्षपात, अनुचित दबाव और पुलिस के जरिए जानबूझकर बसों का चालान करवाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह सब योजनाबद्ध ढंग से किया जा रहा है, जिससे नोएडा की बसों का संचालन बाधित हो और मानसिक तनाव का माहौल बनाया जा सके।
कांवड़ के समय से बिगड़ा समीकरण
एआरएम रोहताश कुमार ने बताया कि पहले नोएडा की केवल 4 बसों का संचालन मेरठ से होता था, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान ये संख्या 46 तक पहुंच गई। इससे मेरठ डिपो का संचालन प्रभावित हुआ और तभी से आपसी समन्वय की भावना में दरार आ गई। मेरठ अब ना केवल बसों को रोक रहा है बल्कि किसी भी तरह का सहयोग भी नहीं दे रहा है।
अब शासन से हस्तक्षेप की उम्मीद
इस विभागीय खींचतान के चलते नोएडा की बसों को मेरठ डिपो के भीतर प्रवेश नहीं मिल रहा, जिससे स्टाफ में हताशा है और यात्री असुविधा में हैं। ऊपर से चालान की कार्रवाई ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। राजस्व के नुकसान को देखते हुए अब इस मामले में शासन से हस्तक्षेप की मांग उठने लगी है।
एक सरकार, एक विभाग, लेकिन दो रुख
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह विवाद एक ही सरकार के अधीन एक ही विभाग के दो अलग-अलग डिपो के बीच है। अब सवाल उठता है कि आखिर यह अंतर्विरोध कब तक चलेगा ? यात्रियों की सुविधा और विभाग की साख के लिए जरूरी है कि जल्द से जल्द इस मामले का समाधान निकाला जाए।