पयागपुर विधायक ने खोला मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा,
शासन ने बनाई हाईपावर जांच कमेटी
1 months ago
Written By: विनय के. सिंह
लखनऊ: बहराइच जिले के सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की लापरवाही से जुड़े एक मामले में महराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सहित कई डाक्टर फंस गए हैं। विशेश्वरगंज की एक प्रसूता को भर्ती न करने एवं मजबूर होकर प्रसूता द्वारा प्राइवेट अस्पताल में प्रसव कराने से जुड़े एक मामले में पयागपुर विधायक सुभाष त्रिपाठी ने शासन में सख्त नाराजगी दर्ज कराई। जिससे हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को लेकर हाईपावर जांच कमेटी गठित कर दी है।
यह अधिकारी करेंगे जांच
विधायक की शिकायत के बाद इस मामले को लेकर शासन में हड़कंप मच गया है। हालात यह है कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा ने हाईपावर कमेटी का गठन किया है। जिसमें चिकित्सा शिक्षा की महानिदेशक किंजल सिंह, शासन की विशेष सचिव कृतिका शर्मा, लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल की प्रोफेसर नीतू सिंह शामिल हैं। कार्यालय के ज्ञाप के मुताबिक इस की जांच उक्त तीनों अधिकारी करेंगी। रिपोर्ट सौंपने के बाद मेडिकल कॉलेज के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

क्या था मामला
पयागपुर के विशेश्वरगंज ब्लॉक के अमराई गांव के निवासी उमेश पाल की पत्नी वसंत कुमारी को विगत 12 जुलाई को दोपहर तीन बजे प्रसव पीड़ा होने पर जनपद के महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। जहां उपस्थित चिकित्सकों द्वारा उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया गया। जिसकी सूचना पर क्षेत्रीय विधायक सुभाष त्रिपाठी ने डॉ अंजू श्रीवास्तव से फोन पर बातचीत की, लेकिन डॉ अंजू श्रीवास्तव की ओर से कोई सहयोग नहीं किया गया। बाद में विधायक ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजय खत्री को इस बावत अवगत कराया, लेकिन उन्होंने भी कोई सहयोग नहीं किया। हालात यह हुए कि मजबूर होकर उमेश पाल को अपनी पत्नी का प्रसव एक प्राइवेट अस्पताल में करवाना पड़ा। सुभाष त्रिपाठी द्वारा शासन में की गई शिकायत में यह अवगत कराया गया कि बहराइच के सरकारी अस्पताल के अधिकारी और डाक्टर मरीजों से इसी तरह का व्यवहार करते हैं, जिसके कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है और बदनामी सरकार की होती है।