मौत के बाद भी भरना पड़ेगा बिजली का बकाया, कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला,
जानें क्या है पूरा मामला
1 months ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: मैनपुरी की स्पेशल कोर्ट (ईसी एक्ट) ने बिजली चोरी से जुड़े एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी आरोपी की मुकदमा लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई स्वतः समाप्त मानी जाएगी। लेकिन इसके बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) मृतक के बकाए की वसूली उसके उत्तराधिकारियों से कर सकेगा। कोर्ट का यह आदेश भविष्य में लंबित मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।
2011 से जुड़ा मामला, काटा गया था कनेक्शन
यह केस मैनपुरी जिले के भोगांव थाना क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद बहारुद्दीन पुत्र हाजी अलाउद्दीन से जुड़ा है। 30 जुलाई 2011 को उपखंड अधिकारी (JE) विनोद कुमार ने उनके घर का बिजली कनेक्शन 35,660 रुपये की बकाया राशि के चलते काट दिया था। बाद में जांच में पता चला कि बहारुद्दीन ने बिना बिल जमा किए अवैध रूप से बिजली का उपयोग करना जारी रखा। इस पर JE ने भोगांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और मामला कोर्ट पहुंचा।
11 साल पहले हो चुकी थी आरोपी की मौत
यह केस वर्षों तक अदालत में लंबित रहा। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई बार वारंट भी जारी हुए। हाल ही में जब पुलिस ने आरोपी की तलाश में तामील प्रक्रिया शुरू की, तब यह सामने आया कि बहारुद्दीन की मौत 11 साल पहले ही हो चुकी है। पुलिस ने अदालत में उनका मृत्यु प्रमाणपत्र पेश किया। इसके आधार पर विशेष न्यायाधीश राकेश पटेल ने आरोपी के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमा समाप्त कर दिया।
उत्तराधिकारियों से होगी बिजली बिल की वसूली
हालांकि अदालत ने साफ किया कि यह फैसला केवल आपराधिक कार्यवाही को लेकर है। पावर कॉर्पोरेशन को बकाया बिल की वसूली का अधिकार अब भी है और वह यह रकम मृतक के उत्तराधिकारियों से वसूल सकता है। कोर्ट ने माना कि मृतक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती, लेकिन आर्थिक दायित्व को खत्म नहीं किया जा सकता।
फैसले से बन सकती है न्यायिक मिसाल
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में बिजली चोरी जैसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को स्पष्टता देगा। अब ऐसे केसों में जहां आरोपी की मृत्यु हो चुकी हो, वहां कोर्ट का रुख साफ रहेगा, जिससे न्याय प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सकेगी।