नदी के ऊपर बहती नहर, यूपी में दिखता है इंजीनियरिंग का ये अनोखा कमाल,
इंदिरा डैम बना पर्यटकों की पसंद
1 months ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: अगर हम आप को एक ऐसी जगह के बारे में बताएं जहां नीचे नदी बहती हो और उसके ऊपर से बह रही हो नहर तो कैसा लगेगा। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन लखनऊ से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित इंदिरा डैम में यह नजारा सच्चाई है। यहां नीचे बहती है गोमती नदी और उसके ऊपर से गुजरती है इंदिरा नहर। यह दृश्य न सिर्फ देखने में शानदार लगता है, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग की एक अनोखी मिसाल भी है। अब यह डैम पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
कैसा है यह अनोखा स्ट्रक्चर
इंदिरा डैम को इंजीनियरिंग की भाषा में एक्वाडक्ट कहा जाता है। यह एक ऐसा ढांचा है जिसमें ऊपर से नहर का पानी बहता है और नीचे नदी बहती है। इस डैम की चौड़ाई नीचे की ओर लगभग 35 मीटर और ऊपर की ओर करीब 45 मीटर है। पानी के तेज बहाव के बावजूद नहर का पानी बिना किसी रुकावट के गुजरता है। इसकी मजबूती के लिए इसमें छह कॉलम और दो पियर्स बनाए गए हैं। कुछ समय पहले इसमें तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसे सुधारने के लिए IIT मुंबई की मदद ली गई और अब यह पूरी तरह सुरक्षित है।
जानें इसका इतिहास और उद्देश्य
इंदिरा नहर परियोजना की नींव 1958 में रखी गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के करीब 15-16 जिलों तक पानी पहुंचाना था। बाद में 1975 में जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं, इस परियोजना को नया रूप दिया गया और इसे इंदिरा नहर नाम मिला। इसके बाद यह परियोजना राजस्थान मॉडल से प्रेरित होकर और भी जिलों तक विस्तारित की गई।
पानी ही नहीं अब बना पर्यटन का भी केंद्र
इंदिरा नहर का पानी आज सुल्तानपुर, जगदीशपुर जैसे इलाकों तक पहुंचता है और पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करता है। इसके साथ ही यहां का हरियाली भरा शांत वातावरण, दोनों ओर बने पुल और नदी-नहर का अद्भुत संगम लोगों को आकर्षित करता है। अब यह स्थान घूमने आने वालों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन बन चुका है।
ऐसा ही एक और उदाहरण है कासगंज का झाल ब्रिज
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में भी ऐसा ही एक ऐतिहासिक स्ट्रक्चर मौजूद है, जिसे नदरई पुल या झाल ब्रिज कहा जाता है। यह 1885 से 1889 के बीच अंग्रेजों के शासनकाल में बना था। यहां भी ऊपर गंगा नहर बहती है और नीचे काली नदी। इसकी कुल लंबाई 346 मीटर है और यह 7095 क्यूसेक पानी छोड़ने की क्षमता रखता है। यह पुल आज आर्किटेक्चर के छात्रों के लिए अध्ययन का एक बेहतरीन स्थल बन चुका है।