गलती ज की थी, सज़ा म को मिली... 17 साल तक बेगुनाही के लिए लड़ता रहा युवक,
अब मिला इंसाफ तो फूट-फूट कर रो पड़ा
1 months ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: गलती किसी और की और सजा किसी और को यह कहावत उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के एक आम किसान के जीवन में भयावह सच बन गई। यह कहानी है राजवीर सिंह यादव की, जिनकी जिंदगी पुलिस की एक लापरवाही से नर्क बन गई। एक मामूली लिपकीय गलती के कारण राजवीर पर गैंगस्टर एक्ट लग गया और उन्हें 22 दिन जेल में रहना पड़ा। हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें निर्दोष घोषित कर दिया, लेकिन इस गलती ने उनके 17 साल बर्बाद कर दिए रोज़ी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई और मानसिक शांति सब छिन गया।
अदालत ने माना निर्दोष, पुलिस पर कार्रवाई का आदेश
अब 55 वर्षीय राजवीर सिंह को अदालत से राहत मिली है। शनिवार को मैनपुरी की विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की घोर लापरवाही के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को सज़ा भुगतनी पड़ी। साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं। राजवीर ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि मैं बार-बार कहता रहा कि मैं निर्दोष हूं, लेकिन किसी ने नहीं सुना। मुझे जबरन उठा लिया और जेल भेज दिया गया। मैंने अपनी बेटियों की शादी किसी तरह की, बेटे की पढ़ाई छूट गई, सब कुछ खत्म हो गया।
2008 के चुनावी झगड़े से जुड़ा था मामला
यह मामला 31 अगस्त 2008 का है, जब मैनपुरी के नगला भांत गांव में चुनावी विवाद के बाद मनोज यादव समेत चार लोगों पर हत्या की कोशिश और SC/ST एक्ट में केस दर्ज हुआ। इसके बाद उन पर गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया गया। लेकिन जब गैंग चार्ट तैयार हुआ, तो तत्कालीन एसएचओ ओमप्रकाश ने आरोपी रामवीर की जगह गलती से उसके बड़े भाई राजवीर सिंह यादव का नाम दर्ज कर दिया।
पुलिस ने कोर्ट में मानी गलती, फिर भी चलता रहा केस
जब राजवीर को गिरफ्तार किया गया तो उन्होंने आगरा की विशेष अदालत में याचिका देकर बताया कि वह निर्दोष हैं। दिसंबर 2022 में इंस्पेक्टर ओमप्रकाश ने भी अदालत में स्वीकार किया कि नाम गलती से जोड़ा गया था। कोर्ट ने उसी दिन उनकी रिहाई का आदेश दिया। मगर इसके बावजूद, एसआई शिवसागर दीक्षित ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी और मुकदमा चलता रहा।
22 दिन की जेल और 17 साल की यातना
2012 में केस की सुनवाई शुरू हुई और फिर मैनपुरी की गैंगस्टर कोर्ट में मामला स्थानांतरित हो गया। 2025 में विशेष न्यायाधीश स्वप्न दीप सिंघल ने राजवीर को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए कहा कि मैनपुरी पुलिस की लापरवाही ने एक निर्दोष को जेल भेजा और उसे वर्षों तक न्याय के लिए भटकना पड़ा।
अब होगा दोषी पुलिसकर्मियों पर शिकंजा
अदालत ने मैनपुरी एसएसपी गणेश प्रसाद साहा को आदेश दिया कि ओमप्रकाश, दीक्षित और अन्य दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही वास्तविक आरोपी रामवीर यादव के खिलाफ नई चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए। हालांकि एसएसपी ने कहा कि अभी उन्हें आदेश की प्रति नहीं मिली है और वे उसके अनुसार कार्यवाही करेंगे।