धीरेंद्र शास्त्री महिलाओं की तस्करी करते हैं... लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रो. रविकांत चंदन का सनसनीखेज दावा,
कि फांसी की मांग
30 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर रविकांत चंदन ने एक बार फिर अपने विवादित बयानों से सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार उन्होंने मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रोफेसर ने दावा किया है कि धीरेंद्र शास्त्री धर्म की आड़ में महिला तस्करी जैसे संगीन अपराध में शामिल हैं। उन्होंने मांग की है कि मामले की गहन जांच के बाद अगर आरोप सही साबित हों, तो धीरेंद्र शास्त्री को फांसी दी जाए।
एम्बुलेंस में पकड़ी गईं महिलाएं
प्रोफेसर रविकांत चंदन ने अपने पोस्ट में 28 जुलाई की रात छतरपुर जिले के लवकुशनगर थाना क्षेत्र की एक घटना का जिक्र किया है। उनके अनुसार, पुलिस ने एक एम्बुलेंस पकड़ी जिसमें 13 महिलाओं को कथित रूप से जबरन कहीं ले जाया जा रहा था। प्रोफेसर ने इस घटना को महिला तस्करी बताया और दावा किया कि इस पूरी साजिश के पीछे धीरेंद्र शास्त्री का हाथ है। उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में यह घिनौना काम हो रहा है और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
वीडियो के आधार पर लगाया आरोप
रविकांत चंदन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, वे एक वायरल वीडियो पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि वीडियो की सत्यता की जांच जरूरी है और अगर उसमें दिख रही बातें सही साबित होती हैं, तो धीरेंद्र शास्त्री को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।
पीएम मोदी और आरएसएस पर भी निशाना
इतना ही नहीं, प्रोफेसर रविकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि पहले भारतीयों के हाथों में हथकड़ी, फिर सीजफायर की धमकी। मोदी जी की ट्रंप से दोस्ती की और कितनी कीमत देश चुकाएगा। इससे पहले भी वे आरएसएस और काशी-ज्ञानवापी मुद्दे पर दिए गए बयानों के कारण विवादों में रह चुके हैं।
लगातार विवादों में रहे हैं प्रोफेसर रविकांत
यह कोई पहली बार नहीं है जब प्रोफेसर रविकांत चर्चा में आए हों। 2022 में उनके एक बयान पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था और उन पर हमला भी हुआ था। जून 2025 में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। अब एक बार फिर उनकी टिप्पणी से विवाद गहरा सकता है और विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है।