यूपी में सोशल मीडिया से जहर फैला रहे थे ISI के नुमाइंदे…शरीयत कानून लागू कराने का था टास्क...
कट्टरपंथ की डिजिटल फैक्ट्री के दो कर्मी गिरफ्तार...
27 days ago
Written By: आदित्य कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश एटीएस ने देश विरोधी गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच के दौरान सामने आया कि पाकिस्तान से संचालित हो रहा एक व्हाट्सएप ग्रुप "Reviving Islam" भारत में युवाओं को कट्टरपंथ की आग में झोंकने की साजिश रच रहा था। इस ग्रुप में तीन एडमिन सहित लगभग 400 पाकिस्तानी सदस्य शामिल हैं, जो उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों के युवाओं को जोड़कर उन्हें सरकार विरोधी मानसिकता के लिए उकसा रहे थे। इसपर कार्रवाई करते हुए UP ATS ने UP के अलग-अलग इलाकों से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
भारत में शरियत लागू करने की साजिश
इस ग्रुप के माध्यम से भारत में शरीयत लागू करने की अपील, गैर-मुस्लिमों के प्रति नफरत फैलाने और भारत सरकार के खिलाफ अफवाह फैलाने जैसे देशद्रोही एजेंडे पर काम किया जा रहा था। यूपी एटीएस की साइबर विंग ने ओपन-सोर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, गूगल मैप्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और ट्विटर के जरिए हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी। जैसे ही पुख्ता जानकारी हाथ लगी, गाजियाबाद और सिद्धार्थ नगर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।
ISI के इशारे पर चल रहा था ग्रुप, 2 गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पता चला कि "Reviving Islam" नामक यह ग्रुप पाकिस्तान की कुख्यात एजेंसी आईएसआई के इशारे पर चलाया जा रहा था। इसमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, गुजरात जैसे राज्यों के साथ-साथ नेपाल सीमा से सटे इलाकों के युवा भी सक्रिय थे। फिलहाल इस ग्रुप में 310 सदस्य अभी भी एक्टिव पाए गए हैं, जो भारत की अखंडता के लिए गंभीर खतरा माने जा रहे हैं। 1 अगस्त से 3 अगस्त 2025 के बीच एटीएस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मोहम्मद उमर पुत्र सत्तार (निवासी: अब्दुल्ला पाकबड़ा, मुरादाबाद) और अब्दुल कदीर पुत्र रहमान (निवासी: डुमरियागंज, सिद्धार्थ नगर) को गिरफ्तार किया है। दोनों अभियुक्तों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
आरोपियों का कुबुनामा
पूछताछ में दोनों ने कबूल किया है कि वे सोशल मीडिया के ज़रिए कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के संपर्क में आए। उनके माध्यम से भारत में शरीयत लागू करने, अफवाहें फैलाने और अल्पसंख्यकों के नाम पर झूठे प्रचार कर नफरत फैलाने का काम कर रहे थे। पाकिस्तान से मिलने वाले डिजिटल दिशा-निर्देशों के आधार पर युवाओं को भड़काया जा रहा था, ताकि देश में अराजकता फैलाई जा सके।